भारतीय राजनीति के म नरेंद्र मोदी एक अइसन मास्टर बनके उभरे हें, जेकर कूंची के अगला स्ट्रोक का होही, एकर अंदाजा बड़े-बड़े राजनीति के जानकार मन घलो नइ लगा पावत हें। चार बार मुख्यमंत्री अउ तीन बार प्रधानमंत्री रहे के बाद अब गली-खोर म ये चर्चा जो़र धर ले हे कि का मोदी जी 'महिला सशक्तिकरण' के नांव म कोनो अइसन ब्रह्मास्त्र निकाले बर जावत हें, जेकर ले विपक्ष 'राईछाई' हो जाय। चर्चा हे देस के पहिली 'भाजपा ब्रांड' महिला प्रधानमंत्री के। सूत्र अउ राजनीति के गलियारा के मानबो त मोदी जी एक अइसन इतिहास लिखे के तैयारी म हें, जेन आघू कतको बछर तक भारतीय राजनीति के दसा अउ दिसा ल बदल दलिही। आखिर महिला सशक्तिकरण के एकर ले बड़े अउ जीता-जागत विज्ञापन का हो सकथे कि देस के लगाम एक अइसन बेटी के हाथ म होय, जेन ह कड़ा मिहनत अउ संघर्ष ले अपन रद्दा बनाही।
ये सब्बो गोठ-बात के पाछू 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के वो कहानी घलो हे, जेला भाजपा ह बड़े सोर-शराबा के साथ दुनिया के आघू रखे रहिस। हालांकि तकनीकी अड़चन के सेती वो ह पूरा नइ हो पाइस, फेर भाजपा ह एकर पूरा ठीकरा ल विपक्ष के मुड़ म फोड़े म कोनो कसर नइ छोड़िस। एक कोती कांग्रेस अपन जुन्ना फाइल मन ले पहिली महिला प्रधानमंत्री अउ पहिली महिला राष्ट्रपति के सबूत निकालत हे, त ओती 'नवा भारत' के गोठ कुछु अउ कहत हे। इहाँ सशक्तिकरण केवल इतिहास के पन्ना म छपे अंक मन ले नइ, बल्कि आज के वो 'मास्टर स्ट्रोक' ले नापे जाथे जो सीधा जनता के दिल म चोट करय। एही कड़ी म स्मृति ईरानी अउ कंगना रनौत अइसन नांव निकल के आघू आवत हें, जेमन म मोदी जी सही 'दहाड़' अउ 'कैमरा फ्रेंडली' अंदाज़ कूट-कूट के भरे हे।
स्मृति ईरानी के बात करबो त ओकर म 'तुलसी' सही धीरज ले लेके संसद म 'चंडी' रूप धर लेवे तक के एक लंबा सफर समाए हे। ओ ह जइसन ढंग ले अमेठी के किला ल ढहाइस, वो ह ओकर हिम्मत के सबले बड़े परमान हे। अगर वो ह प्रधानमंत्री के कुर्सी तक पहुँचथे, त वो ह न केवल विपक्ष के हर हमला ल अपन गोठ-बात ले थोरिक म सल्टा दलिही, बल्कि महंगाई अउ अउ दूसर मुद्दा म अइसन दलील पेश करही कि विपक्ष करा सदन ले बाहिर जाय के अलावा अउ कोनो रद्दा नइ बाचही। दूसर कोती, मंडी के सांसद कंगना रनौत हे, जेकर आत्मविश्वास अइसन हे कि वो ह अपन आप ल ही असली 'आजादी' के चेहरा मानथे। अगर वो ह पीएम के रेस म आघू आथे, त ये ह केवल राजनीति नइ बल्कि एक सांस्कृतिक बिस्फोट होही। कंगना के 'पंगा' लेवे के सुभाव वो मतदाता मन ल बहुते सुहाथे, जो सुध-बुध वाले राजनीति के जगह एक 'धाकड़' नेतृत्व देखना चाहत हें।
आखिर म, ये पूरा माहौल राजनीति के बिसात म बिछे वो शतरंज सही हे, जहाँ मोदी जी एक ही चाल म पूरा विपक्ष ल 'चेक अउ मेट' करे के ताकत रखथें। यदि भाजपा एमन ले कोनो भी चेहरा ल आघू करथे, त राहुल गांधी ले लेके ममता बनर्जी तक के 'महिला कार्ड' ताश के पत्ता सही बिखर जाही। ये ह केवल एक प्रधानमंत्री के चुनाव नइ होही, बल्कि विपक्ष के वो अड़ंगा ल सोने के मुकुट म बदले के काम होही, जेन ल भाजपा ह महिला बिल के नांव म बनाके रखे हे। 20 बछर तक बंगाल ले लेके केरल तक जीत के जो सपना भाजपा देखत हे, ओला सच म बदले बर स्मृति के 'गुस्सा' या कंगना के 'पंगा' एक बड़े भूमिका निभा सकथे। अब देखना ये हे कि दिल्ली के दरबार म 'महाभारत' के ढंग म राज-काज चलही या फेर कोनो 'बॉलीवुड फिलिम' सही नवा धमाका होही।


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