साहित्य साधना के एक अध्याय के अंत
सुशील भोले जी सिरिफ एक लेखक नइ रहिन, बल्कि छत्तीसगढ़ी भाखा अउ संस्कृति के एक अइसे सजग प्रहरी रहिन जेमन अपन पूरा जिनगी ला छत्तीसगढ़िया अस्मिता बर होम कर दीन। उंकर जाय ले छत्तीसगढ़ी साहित्य जगत म अइसे खाली जगह बन गे हे, जेला भर पाना मुस्किल हे।
दिग्गज साहित्यकार मन के संस्मरण
आखिरी विदाई के बेरा म प्रदेश भर के साहित्यकार अउ पत्रकार मन अपन रोवासी मन ले भोले जी ला सुरता करिन:
जागेश्वर प्रसाद (राज आंदोलनकारी, वरिष्ठ साहित्यकार/ पत्रकार): "सुशील एक जुझारू लेखक रिहिन। ओमन एकमात्र अइसे कलमकार होइन जेमन छत्तीसगढ़ के मूल संस्कृति ल लेके ठोस बुता करिन। सुशील ल मैं नानपन ले जानत हंव, ओला खेलाये हंव। हमर बीच छत्तीसगढ़ अउ छत्तीसगढ़ी ल लेके हमेशा चर्चा होत राहय। अइसन माटी पुत्र के बिदा होना छत्तीसगढ़ी समाज बर बड़ पीरा के बात हे।"
चंद्रशेखर चकोर (साहित्यकार) : "सुशील भोले ले मोर परिचय 'मयारू माटी' के बखत ले होइस। उंकर लेखन म गजब के गंभीरता रिहिस। ओमन अपन पत्रिका म कई झिन नवा कलमकार मन ला मउका दीन। उंकर कृति 'आखर अंजोर' छत्तीसगढ़ के मूल संस्कृति अउ दर्शन बर एक शोध ग्रंथ आय।"
गोविंद धनगर (गीतकार): "भोले जी पहिली अपन नाम के साथ 'सुकुव' उपनाम लिखत रिहिन, फेर साधना काल के बाद ओमन भगवान शिव के नाम 'भोले' ल अपन नाम ले जोड़ लिन अउ सुशील भोले बन गे।"
डिजिटल माध्यम ले छत्तीसगढ़ी के प्रचार
जयंत साहू जी ह उंकर आखिरी दिन मन के संघर्ष ल सुरता करत किहिन कि; "भोले जी छत्तीसगढ़ी पत्रकारिता के जोत ल हर जगह बारे के कोसिस करिन। जब उंकर स्वास्थ्य बिगड़गे अउ ओमन लकवा के शिकार होइन, तब मैं उनला डिजिटल माध्यम ले जुड़े बर प्रेरित करेंव। उंकर बर 'मयारू माटी' नाम के एक ब्लॉग बनाये रहेंव, जेमा ओमन सरलग लिखत रिहिन। कभु नई सोचे रहेन कि ओमन अचानक हमर बीच ले चल देही।"
अंतिम विदाई म उमड़िस साहित्यकार मन के हुजूम
सुशील भोले जी ल अंतिम विदाई दे बर मारवाड़ी श्मशान घाट म छत्तीसगढ़ के दिग्गज साहित्यकार, लेखक अउ पत्रकार मन उपस्थित रहिन, जेमा प्रमुख रूप ले:
जागेश्वर प्रसाद, स्वराज्य दास, सुखदेव राम साहू, दिनेश चौहान, रामगुलाम ठाकुर, चंद्रशेखर चकोर, गोविंद धनगर, जयंत साहू, संजीव साहू, धीरेन्द्र साहू, दुष्यंत साहू, इंद्रदेव यदु, गजेन्द्ररथ वर्मा, राजेश नायक, मुकेश टिकरिहा, गुलाल वर्मा, परमानंद वर्मा, रसिक बिहारी अवधिया, सकुन वर्मा, अउ डॉ. जितेन्द्र सिंगरौल सहित भारी संख्या म गणमान्य नागरिक शामिल रहिन।
"सुशील भोले जी के लेखनी अउ उंकर विचार हमर छत्तीसगढ़ी समाज बर हमेशा रस्ता देखइया अंजोर बनके राहय।"


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