छत्तीसगढ़ी लोक गायकी के दुनियां म नवा सुर-संगीत के संग अपन मधुर आवाज ले छत्तीसगढ़ के जन मानस ऊंचहा ठउर पोगराये मिथलेश्वरी सेन के नवा वीडियो एल्बम मांझी रिलीज होगे हावय। गाना बहुत ही सुमधुर हाबे, गीत-संगीत मन ल मोह डारथे। भावाभिनय म स्वयं मिथलेश्वरी के अदा अउ फिल्मांकन तको गजब के हावय, घेरी-बेरी सुने के मन करथे। मिले आरो के मुताबिक 'मांझी' गीत के रचना अउ संगीत स्वयं मिथलेश्वरी सेन के हावय, एक तरह से केहे जाए के वो एक बहुमुखी प्रतिभाशाली कलाकार आए।
मिथलेश्वरी सेन के गायकी म अलग किसम के नशा हावय। क्लासिकल के संग सूफियाना अंदाज म जब ओमन सुर लगाथे तव लोकगीत के रस सौ गुना बाड़ जथे। अब तक के जतेक भी जुन्ना लोक गायिका होए हाबे, ओमन भले ही क्लासिकल के एको राग नी सीखे फेर जब गावय तो सउहे मां सरस्वती कंठ म बिराजमान होके सातो सुर के झनकार बगरा देवय। जब भी मिथलेश्वरी सेन के गीत सुनबे उही किसम के भाव जागथे। चाहे रामायण भजन के भक्ति गीत हो या लोक विधा के आन गीत, मन आनंदित हो उठथे।
मिथलेश्वरी सेन के आवाज म पहिली तको भक्ति गीत के आनंद लेवत रेहेन। जेमा भोले बर करत सिंगार, तै आये अँगना, एक फुलवा, गांव-गांव श्रीराम प्रभु के, आंखी खोल देखना लक्ष्मण, कइसे मुरली बजाके, भगवा रंग रंगाके, शबरी ओ दाई वो, परनाम करॅंव बाबा, मां का नाम है काली, मुझमें समाये शंभू जइसे भक्ति गीत के अलावा गाबो ददरिया रे, जादू डारे बिदेशिया, डीजे वाली बनके, मोहनी खवाके, ससुराल गेंदा फूल, रही रहिके तोर सुरता आथे आदि गीत ह मिथलेश्वरी सेन के गायकी के कद ल बड़ाथे। छत्तीसगढ़ी सिनेमा म पार्श्व गायन के रूप सुपरहिट फिलिम 'सुकवा' म तको उंकर गीत खासे लोकप्रिय होइस।
मिथलेश्वरी सेन छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध रामायण, भजन के संग एक प्रतिष्ठित लोक गायिका आए। मूलत: रामायण भजन ले ओमन शुरूआत करिस, फेर लोकगीत म कइसे आना होइस ये बात के आरो ले पहिली आव जानथन मिथलेश्वरी सेन व्यक्तिगत परिचय- मिथलेश्वरी सेन ग्राम बोडरा (धनेली), जिला बालोद के रहइया आए। डांस अउ गायन के शौक ओमन ल इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय ले जोड़िस, क्लासिकल म्यूजिक म एम.ए. के शिक्षा पाइस। मिथलेश्वरी सेन ओमन रामायण-भजन, जागरण, अउ आन भक्ति कार्यक्रम खातिर जय मां विंध्यवासिनी बालिका मानस परिवार के संचालन करथे। गांव-गांव के मानस मंच म ओकर अपन गायन के अमिट छाप छोड़े हावय।
मिथलेश्वरी सेन के लोकप्रिय वीडियो एल्बम
मिथलेश्वरी सेन : रामायण मंचन, जागरण, भक्ति आयोजन हेतु संपर्क करें-
🔰 जय मां विंध्यवासिनी बालिका मानस परिवार
📍 ग्राम - बोडरा (धनेली), जिला - बालोद (छत्तीसगढ़)
📱 9753976318, 8120026584
मिथलेश्वरी सेन : सोशल मीडिया ठिहा-
प्रमुख सूफियाना/सूफी गायिकाएँ-
- आबिदा परवीन (Abida Parveen): उन्हें सूफी संगीत की महारानी कहा जाता है। वह सूफियाना कलाम को दिलों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं।
- हर्षदीप कौर (Harshdeep Kaur): इन्हें "सूफी की सुल्ताना" के नाम से भी जाना जाता है और इन्होंने बॉलीवुड में कई लोकप्रिय सूफी गाने दिए हैं, जैसे "दिलबरो", "हीर" और "कबीरा"।
- रेखा भारद्वाज (Rekha Bhardwaj): राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता गायिका, जो अपनी अनूठी आवाज और सूफी, बॉलीवुड और ग़ज़ल संगीत में योगदान के लिए जानी जाती हैं।
- सोनिया अरोड़ा (Sonia Arora): भारत में प्रमुख सूफी गायिकाओं में से एक, जो शास्त्रीय और अर्ध-शास्त्रीय दोनों तरह के सूफी संगीत में निपुण हैं।
- कविता सेठ (Kavita Seth): वह भी एक जानी-मानी सूफी गायिका हैं।
- रिचा शर्मा (Richa Sharma): सूफी शैली में उनके भावपूर्ण गायन के लिए जानी जाती हैं।
- नूरन सिस्टर्स (Nooran Sisters - ज्योति और सुल्ताना): ये सूफी गायन के अपने शक्तिशाली और ऊर्जावान अंदाज के लिए प्रसिद्ध हैं।
- शिल्पा राव (Shilpa Rao): हालांकि वह मुख्य रूप से पार्श्व गायिका हैं, उन्होंने कुछ लोकप्रिय सूफी-शैली के गीतों में भी अपनी आवाज दी है।
- इलाही सूफी कव्वाली (Ilahi Sufi Qawwali): यह दुनिया का पहला महिला पारंपरिक कव्वाली समूह है, जो इस विरासत को आगे बढ़ा रहा है।
- उषा उथुप (Usha Uthup): वह अपनी विशिष्ट, गहरी 'कंट्राल्टो' (contralto) आवाज़ और बहुमुखी गायन शैली के लिए जानी जाती हैं। वह 1970 के दशक से भारतीय संगीत में एक प्रमुख हस्ती रही हैं।
- इला अरुण (Ila Arun): वह अपनी लोक-शैली और दमदार, थोड़ी खुरदुरी आवाज़ के लिए जानी जाती हैं, विशेष रूप से राजस्थानी लोक गीतों में।
- ममता शर्मा (Mamta Sharma): "मुन्नी बदनाम हुई" जैसे गानों के लिए जानी जाने वाली ममता शर्मा की आवाज़ भी एक अलग और भारी टोन वाली है।
- सपना अवस्थी (Sapna Awasthi): उनकी आवाज़ में भी एक अनूठा और भारीपन है, जिन्होंने "चल छैयां छैयां" जैसे लोकप्रिय गाने गाए हैं।


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