कवासी लखमा अपनेच माटी बर परदेसी, आखिर ओकर छत्तीसगढ़ म रेहे ले कोन ल खतरा हे?

अंजोर
0
कवासी लखमा अपनेच माटी बर परदेसी, आखिर ओकर छत्तीसगढ़ रेहे ले कोन ल खतरा हे?


बस्तर के कद्दावर नेता अउ कोंटा विधायक कवासी लखमा आज अपनेच राज छत्तीसगढ़ ले दूर उड़ीसा के मलकानगिरी में डेरा डारे बर मजबूर हें। सुप्रीम कोर्ट ह ओमन ला जमानत तो दे दीस, फेर छत्तीसगढ़ में कदम रखे बर रोक लगा दीस। सनिच्चर के दिन जब वो मलकानगिरी पहुँचिन, त कोंग्रेस कार्यकर्ता मन ह ओकर भारी सुवागत करीन, फेर ए सुवागत के पीछे एक ठन बड़ सवाल लुकाये हे। का ये लखमा के माटी-पुत्र होय के सजा आय?

आज जनता के मन में कतकों सवाल उठत हे, जेकर जवाब मिलना जरूरी हे। आदिवासी होना गुनाह हे का? का एक आदिवासी नेता होना या अपन समाज के आवाज उठाना कोनो गुनाह आय? कवासी लखमा जइसन कद्दावर आदिवासी चेहरा ला ओकर अपने माटी ले दूर रखना का ओकर पहिचान ला दबाय के कोसिस आय? जेकर पूरा जिनगी बस्तर के जल-जंगल-जमीन बर बीत गे, वोला आज 'बहिरी' बना दे गे हे। का मूलवासी होना अउ अपन माटी बर लड़ना कोनो अपराध आय?

छत्तीसगढ़ ले डर काबर?: आखिर लखमा के छत्तीसगढ़ आय ले कउन ला डर हे? का कोनो बड़ घटना हो जाय के डर हे, या फेर ये सिर्फ एक राजनीतिक घेराबंदी आय ताकि ओकर प्रभाव ला कम करे जा सके? सवाल तो बहुत अकन होबे कि आखिर अइसन फैसला के का कारण हो सकत हाबे। राजनीति म कुछू भी हो सकत हे, ये भी होसत हे कि प्रदेश म भारतीय जनता पार्टी के सरकार हे अउ ओमन ल अइसे लगत होही के कवासी लखमा के इहां रहे ले ओमन मंसूबा पूरा नइ होही। 

राजनीति अउ अदालती पेंच
कवासी लखमा ला कथित शराब घोटाला अउ मनी लॉन्ड्रिंग के मामला में ED अउ EOW ह 2025 के गिरफ्तार करे रहिस। कोर्ट ह ओमन ला जमानत के सरत में राज ले बाहिर रखे के आदेश दे हे।

लखमा ह भावुक होके कहिन:
"मैं कानून के सम्मान करथंव, फेर मोर मन तो छत्तीसगढ़ अउ मोर जनता में बसथे। मलकनगिरी में रहिके घलो मैं अपन मनखे मन के सेवा करत रहिहूँ।"

एक बड़ सवाल- 
आज ये बात सोचे के हे कि का कोनो नेता ला ओकर राज ले दूर रख के जनता के सेवा ले रोके जा सकत हे? लखमा बर मलकनगिरी आज मजबूरी के ठिकाना बन गे हे, फेर ओकर मन आज घलो बस्तर के गलियाँ में भटकत हे।

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

सबो पाठक ल जोहार..,
हमर बेवसाइट म ठेठ छत्तीसगढ़ी के बजाए रइपुरिहा भासा के उपयोग करे हाबन, जेकर ल आन मन तको हमर भाखा ल आसानी ले समझ सके...
छत्तीसगढ़ी म समाचार परोसे के ये उदीम कइसे लागिस, अपन बिचार जरूर लिखव।
महतारी भाखा के सम्मान म- पढ़बो, लिखबो, बोलबो अउ बगराबोन छत्तीसगढ़ी।

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Accept !