राजनांदगांव। साकेत साहित्य परिषद सुरगी डाहर ले आयोजित समीक्षा गोष्ठी म साहित्यकार मन ह वरिष्ठ साहित्यकार महेन्द्र कुमार बघेल 'मधु' के नवा छत्तीसगढ़ी व्यंग्य संग्रह 'झन्नाटा तुंहर द्वार' ऊपर जमके गोठ-बात करिन। साहित्यकार मन के कहना हे कि ये किताब ह समाज म व्याप्त विसंगति अउ भ्रष्टाचार ऊपर 'झन्नाटा' मारत हे।
साकेत साहित्य परिषद डाहर ले समीक्षा गोष्ठी के आयोजन
सचिव राज कुमार चौधरी 'रौना' के संयोजन म आयोजित ये कार्यक्रम म जिला के नामचीन साहित्यकार मन जुरियाइन। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गजेंद्र हरिहारनो 'दीप' (पूर्व अध्यक्ष, शिवनाथ साहित्य धारा) रहिन अउ अध्यक्षता डॉ. चंद्रशेखर शर्मा (अध्यक्ष, नांदगांव साहित्य परिषद) ह करिन।
साहित्यकार मन के विचार: का हे 'झन्नाटा तुंहर द्वार' म खास?
समाज के दरपन: मुख्य अतिथि हरिहारनो जी ह कहिन कि महेन्द्र बघेल ह राजनीति अउ समाज के बुराई मन ल अपन धारदार लेखनी ले उजागर करे हावे। ये किताब छत्तीसगढ़ी व्यंग्य साहित्य म 'मील के पत्थर' साबित होही।
नवा एंट्री: डॉ. चंद्रशेखर शर्मा ह कहिन कि महेन्द्र बघेल ह अपन पहिली संग्रह ले ही साहित्य जगत म दमदार उपस्थिति दरज कराए हे।
मुद्दा मन के भरमार: वीरेन्द्र कुमार तिवारी 'वीरू' अउ फकीर प्रसाद 'फक्कड़' ह बताइन कि किताब म सराबखोरी, भ्रष्टाचार, पाखंड, महंगाई अउ मिलावटखोरी जइसे गंभीर विषय मन ल व्यंग्य के माध्यम ले उठाए गे हे।
भासा अउ सैली: ओमप्रकाश साहू 'अंकुर' ह कहिन कि किताब म मुहावरा अउ लोकोक्ति के सुघ्घर प्रयोग हे, हालांकि अंग्रेजी सब्द मन के प्रयोग थोड़े ज्यादा महसूस होथे।
कवि गोष्ठी म जमिस रंग
समीक्षा के बाद दूसर सत्र म सरस कवि गोष्ठी होइस, जेमा उपस्थित कवि मन ह अपन-अपन रचना मन ले समा बांध दीन। ए मउका म आनंद राम सार्वा, लखन लाल साहू 'लहर', दिलीप कुमार साहू 'अमृत', नंद किशोर साव 'नीरव' अउ सुषमा शुक्ला समेत कतको साहित्यकार मन अपन विचार राखिन।
खास बात: कवयित्री सुषमा शुक्ला ल उंकर साहित्यिक सक्रियता ल देखत साकेत साहित्य परिषद सुरगी के सदस्यता घलो प्रदान करे गीस। कार्यक्रम के संचालन ओमप्रकाश साहू 'अंकुर' ह अउ आभार प्रदर्शन महेन्द्र बघेल 'मधु' ह करिन।


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