छत्तीसगढ़ महतारी के सुघ्घर बेटी, खोरपा (अभनपुर) के शान अउ हम सबो के चहेती लोकगायिका मालती निषाद जी ल सगाई के ए सुघ्घर बेला में बहुत-बहुत बधाई अउ शुभकामना!
मालती दीदी के सादगी अउ ओकर सुरीली अवाज ह आज हर छत्तीसगढ़िया के दिल में राज करथे। खेत-खलिहान में काम करत-करत ओकर गाये गीत मन हमर पुरखा मन के याद दिला देथे। एक किसान परिवार के बेटी होके घलो, अपन मेहनत अउ कला ले ओमन आज जउन मुकाम हासिल करे हें, ओ ह हमर बर गर्व के बात आय।
मालती दीदी बर कुछ खास बात:
माटी के महक: खेत-खार में काम करत समय दीदी के जउन सुरीली अवाज गूंजथे, ओमा छत्तीसगढ़ के माटी के महक आथे।
संस्कृति के रक्षा: पुराना छत्तीसगढ़ी गीत मन ल नवा पीढ़ी तक पहुँचा के ओमन हमर लोक कला ल बचाये के बड़ सुघ्घर काम करत हें।
सादा जीवन: मानस परिवार ले जुड़े होय के कारण ओकर विचार अउ रहन-सहन ह बहुत सरल अउ आदर्श हे।
भगवान ले एही बिनती हे कि मालती निषाद जी के आघू के वैवाहिक जीवन सुघ्घर अउ खुशहाल होवय। दीदी अइसने छत्तीसगढ़ी संस्कृति के मान बढ़ावत रहय।
"खेत-खार के सुघ्घर बोली, चारों कोती छाये हे,
मालती दीदी के मयारू अवाज ह, सबके मन ल भाये हे।"


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