अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ म यू-ट्यूबर आकांक्षा टोप्पो अउ सरकार के बीच ठन गे हावे। मंत्री रामविचार नेताम ऊपर टिप्पणी करे के सेती आकांक्षा ऊपर एक अउ FIR दर्ज हो गे हे। ए घटना के बाद अब सोशल मीडिया मा एक नवा बहस छिड़ गे हे कि का प्रदेश मा जनता ल विरोध करे के घलो अधिकार नइ हे?
पुरान विवाद के साया
ये कोनो पहिली बार नोहे कि आकांक्षा टोप्पो प्रशासन के निशाना म हे। एकर पहिली घलो महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े के मामला म आकांक्षा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराए गए रिहिस। बार-बार होवत ए कार्रवाई मन ले अब जनता के बीच म कइ प्रकार के सवाल उठत हें।
जनता के आवाज अउ विरोध के अधिकार
ए मामला म आम लोगन अउ सोशल मीडिया यूजर मन के कहना हे कि:
- विरोध के अधिकार: लोकतंत्र मा जनता ल सरकार अउ मंत्री मन के काम-काज ऊपर सवाल उठाए अउ विरोध प्रकट करे के पूरा अधिकार हे।
- दबाए के कोसिस: का बार-बार FIR करके जनता के आवाज ल दबाए के कोसिस करे जात हे?
- सवाल: का जनता हा गलत के विरोध घलो नइ कर सकय? अगर कोनो नागरिक ल कोनो बात गलत लगथे, त ओला बोले के आजादी संविधान हा देहे, फेर अइसन कार्रवाई ले लोगन मा डर के माहौल बनत हे।
सियासी सरगर्मी
आकांक्षा टोप्पो के समर्थक मन के कहना हे कि ओ हा सिरिफ़ जनता के बात ल उठाथे, फेर सत्ता पक्ष के कार्यकर्ता मन एला 'अपमान' मान के पुलिस केस कर देवत हें। अब देखना ये हे कि ए मामला मा पुलिस का कदम उठाथे अउ अभिव्यक्ति के आजादी ल लेके उठत ए सवाल मन के का जवाब मिलथे।

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