भारत सरकार ह अभी हाल म 'पीएम सूर्यघर: मुफ्त बिजली योजना' के सुरुअत करे हे। ए योजना म 1 करोड़ घर मन ला 300 यूनिट मुफ्त बिजली दे के वादा करे गे हे। फेर यदि हमन ए योजना के समय (Timing) अउ एकर पाछू के सरत मन ला गहराई ले देखबो, त एक अलग ही तस्वीर दिखथे। अइसने लगत हे कि ए योजना के असली ढांचा ह आम मनखे के बदला सोलर पैनल बनाने वाला बड़का कंपनी मन, खास करके अडानी सोलर जइसन ग्रुप मन ला फायदा पहुँचाए बर बनाए गे हे।
1. समय के खेल: प्लांट तइयार, फेर योजना लॉन्च
एहा सिरिफ एक संजोग नई हो सकय कि एक कोती अडानी समूह ह गुजरात के मुंद्रा मा भारत के सबले बड़े सोलर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट (लगभग 10 GW क्षमता) तइयार करथे, अउ ओकर तुरंत बाद सरकार ह अचानक 1 करोड़ घर मन बर सोलर योजना ले आथे। जब कंपनी मन करा भारी स्टॉक अउ माल बनाए के ताकत तइयार होगे, तब सरकार ह एक अइसन "बजार" बना दीस जिहां ए पैनल मन के खतपत पक्का हो सके।
2. 'मेड इन इंडिया' के जरूरी सरत अउ सब्सिडी के गणित
ए योजना म सरकार ह एक कड़ा सरत राखे हे- DCR (Domestic Content Requirement)। एकर मतलब ए हे कि सब्सिडी तभे मिलही जब सोलर पैनल ह भारत म बने होही।
फायदा कोन ला? काबर कि भारत म बड़े पैमाना म सोलर पैनल बनाए वाली गिने-चुने कंपनी मन ही हें (जेमा अडानी सबले आगू हे), एखरे बर ए सरत ह विदेशी कंपनी मन ला बाहर कर दीस अउ पूरा मुनाफा सीधा बड़े घराना मन के झोली मा डाल दीस।
सब्सिडी के रद्दा: सरकार जउन सब्सिडी (₹30,000 ले ₹78,000) मनखे मन के बैंक खाता मा डालत हे, ओहा असल मा मनखे मन करा नई रुकय। ओ पैसा ह सीधा ओ वेंडर अउ कंपनी मन करा चल देथे, जेकर ले आप मन महंगा 'स्वदेशी' पैनल बिसावत हो।
3. जनता ला का मिलीस?
सरकार 'मुफ्त बिजली' के विज्ञापन तो करत हे, फेर असलियत ए हे:
भारी खरचा: सब्सिडी मिले के बाद घलो एक मध्यम वर्गीय परिवार ला अपन जेब ले ₹50,000 ले ₹1,00,000 तक खरच करना पड़त हे।
रखरखाव के बोझ: सोलर पैनल के सफाई, बैटरी के खरचा अउ पैनल के कम होत ताकत के जोखिम ह पूरा जनता के ऊपर हे।
कंपनी मन के चांदी: कंपनी मन ला न तो ग्राहक खोजे के जरूरत हे अउ न ही प्रचार करे के; सरकार ह खुद ओ मन बर ग्राहक तइयार करत हे अउ सब्सिडी के रद्दा ले भुगतान ला पक्का करत हे।
4. सब्सिडी या कॉर्पोरेट सहायता?
जानकार मन के कहना हे कि यदि सरकार ह सच मा जनता ला मुफ्त बिजली देना चाहितिस, त ओहा सरकारी बिजली घर मन मा या सरकारी सौर पार्क मन मा पैसा लगा सकतिस। फेर घर के छत म पैनल लगवाए के जिद के पाछू असली मकसद निजी कंपनी मन बर एक 'रिटेल मार्केट' खड़ा करना हे। जनता ह यहाँ सिरिफ एक माध्यम आय, जेकर जरिया सरकारी खजाना के पैसा (टैक्स के पैसा) सब्सिडी के रूप म निजी कंपनी मन के मुनाफा म बदलत हे।
असल बात
पीएम सूर्यघर योजना के चेहरा ह 'लोक कल्याणकारी' दिखथे, फेर एकर ढांचा ह 'कॉर्पोरेट कल्याणकारी' नजर आथे। मुफ्त बिजली के सपना दिखा के देस के 1 करोड़ छत मन ला निजी कंपनी मन के सामान बेचे के 'शोरूम' बना दिए गे हे। आखिरी मा, ए योजना ले जनता ला बिजली मिलय या न मिलय, फेर सोलर कंपनी मन के कमाई ह जरूर चमकइया हे।


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