राजधानी रायपुर के नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन म आज 'रायपुर साहित्य उत्सव 2026' के भव्य सुरुअत होइस। ए कार्यक्रम के उद्घाटन राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश के मुख्य आतिथ्य अउ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के अध्यक्षता म संपन्न होइस। ए समारोह के आयोजन 'विनोद कुमार शुक्ल मंडप' म करे गे रिहिस, जेमा उपमुख्यमंत्री अरुण साव अउ सुप्रसिद्ध अभिनेता मनोज जोशी घलो विशिष्ट अतिथि के रूप म सामिल रहिन।
साहित्य ह आस अउ साहस जगाय के सबले बड़े माध्यम : हरिवंश
उप सभापति श्री हरिवंश ह अपन गोठ के सुरुअत छत्तीसगढ़ के महान साहित्यकार स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल ला नमन करके करिन। ओमन कहिन कि छत्तीसगढ़ी साहित्य के परंपरा बहुत जुन्ना अउ समृद्ध हे। एक ठन किताब अउ एक लेखक मा दुनिया ला बदले के ताकत होथे। आज भारत दुनिया के तेजी ले बढ़त अर्थव्यवस्था आय अउ 2047 तक 'विकसित भारत' के संकल्प मा साहित्य के बड़े भूमिका हे।
साहित्य के महाकुंभ आय रायपुर साहित्य उत्सव: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ह कहिन कि छत्तीसगढ़ प्रभु श्रीराम के ननिहाल आय अउ ए पावन धरती म तीन दिन के साहित्य उत्सव के सुरुअत होना गर्व के बात आय। ओमन कहिन कि ए आयोजन मा देस भर ले 120 ले जादा साहित्यकार आए हें, जउन मन 42 सत्र मा अलग-अलग विषय ऊपर गोठ-बात करिहें।
मुख्यमंत्री ह स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी मन ला सुरता करत कहिन कि हमर कतको सेनानी मन लेखक अउ पत्रकार घलो रहिन। माखनलाल चतुर्वेदी के 'पुष्प की अभिलाषा' अउ माधवराव सप्रे के कहानी 'एक टोकरी भर मिट्टी' ह हमर साहित्य के गौरव आय। ओमन लोचन प्रसाद पांडेय, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी अउ मुक्तिबोध जइसन साहित्यकार मन के योगदान ला घलो रेखांकित करिन।
महान साहित्यकार मन ला समर्पित मंडप
साहित्य उत्सव के मंडप मन के नाम छत्तीसगढ़ के महान विभूति मन जइसन- विनोद कुमार शुक्ल, श्यामलाल चतुर्वेदी, लाला जगदलपुरी अउ अनिरुद्ध नीरव के नाम मा रखे गे हे। मुख्यमंत्री ह अटल बिहारी वाजपेयी जी ला सुरता करत कहिन कि ओकर कविता मन ह करोड़ों मनखे ला प्रेरणा देथें।
किताब मन के विमोचन
ए मउका मा छत्तीसगढ़ राज के 25 साल पूरा होय ऊपर एक सुग्घर 'कॉफी टेबल बुक' अउ 'नेशनल सेल्फहुड इन साइंस' (जे. नंदकुमार), 'लाल दीवारें, सफेद झूठ' (प्रो. अंशु जोशी) अउ 'तेरा राज नहीं आएगा रे' (राजीव रंजन प्रसाद) जइसन किताब मन के विमोचन करे गीस।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ह बसंत पंचमी के दिन ए आयोजन ला साहित्य के महाकुंभ बताइन। ए कार्यक्रम म भारी संख्या मा साहित्य प्रेमी अउ जुवा वर्ग के लइका मन सामिल होइन। ए तीन दिन के उत्सव ह छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक चेतना ला नवा पहिचान देही।


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