guru ghasidas: बाबा गुरु घासीदास के जीवन सब संत-समाज बर प्रेरणा

अंजोर
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छत्तीसगढ़ के पावन धरती म जनमे, सतनाम पंथ के संस्थापक, महान संत अऊ समाज सुधारक बाबा गुरु घासीदास जी के नाँव ल आज भी बड़े आदर से लेहे जाथे।

​👶 जनम अउ बालकाल

  • जनम: गुरु घासीदास जी के जनम 18 दिसंबर 1756 ई. के दिन, रायपुर जिला (अब बलौदाबाजार जिला) के गिरौदपुरी गाँव म होए रहिस।
  • माता-पिता: उनकर दाई के नाँव अमरौतिन बाई अऊ बाबू के नाँव महंगूदास रहिस।
  • बचपन: बचपन से ही गुरु घासीदास के मन म बैराग के भाव जाग गे रहिस। वोहाँ समाज म फैले छुआछूत, ऊँच-नीच अऊ पशुबलि जइसन कुरीति मन ल देखके बहुत दुखी होवत रहिन। वो मूर्ति पूजा ल घलो नकारे रहिन।

​🧘 साधना अऊ ज्ञान प्राप्ति

  • विवाह: युवावस्था म उनकर बिहाव सिरपुर के सफुरा बाई से होए रहिस, फेर उनकर मन संसारिक मोह-माया म नइ लागिस।
  • तपस्या: वोहाँ सत्य के खोज म छत्तीसगढ़ के घनघोर जंगल मन म भटकत रहिन अऊ कई बछर तक गिरौदपुरी के छाता पहाड़ म गहन तपस्या करिन।
  • सतनाम के अलख: कठोर साधना के बाद, वोहाँ सत्य के साक्षात्कार करिन अऊ सतनाम के अलख जगाए के प्रण लिन। उनकर उपदेश म सत्य ही ईश्वर (सतनाम) के मूल मंत्र रहिस।

​🚩 सतनाम पंथ के स्थापना अऊ उपदेश

  • पंथ के स्थापना: सन् 1820 के आस-पास गुरु घासीदास जी ह सतनाम पंथ के स्थापना करिन।
  • सात सिद्धांत (सप्त सिद्धांत): गुरु घासीदास जी ह समाज ल एक नवा दिशा देहे बर सात महत्त्वपूर्ण उपदेश (सप्त सिद्धांत) दीन, जऊन ल आज भी सतनामी समाज मानथे:
    1. सतनाम (सतनाम ल जानव)
    2. मूर्ति पूजा निषेध (मूर्ति पूजा झन करव)
    3. जीव हत्या निषेध (जीव हत्या झन करव)
    4. जाति-भेदभाव निषेध (जाति-पाति के भेद-भाव झन करव)
    5. मांस-मदिरा निषेध (मांस अऊ मदिरा झन खाव-पिऔ)
    6. काम-चोरी निषेध (काम-चोरी झन करव)
    7. हसिया के उपयोग निषेध (हल म गाय ल झन जोतव, अऊ हसिया झन धरव)
  • सामाजिक समता: उनकर उपदेश से दलित, शोषित अऊ पीड़ित लोगन मन म एक नवा चेतना अऊ आत्मविश्वास जाग्रत होइस। वोहाँ सबो मनखे ल एक समान माने के संदेश दीन।

​🏞️ समापन

  • देहावसान: गुरु घासीदास जी के देहावसान सन् 1850 ई. म होइस।
  • विरासत: उनकर बेटा गुरु बालकदास जी ह उनकर बताए रद्दा ल अऊ सतनाम पंथ ल आगू बढ़ाइन।

​बाबा गुरु घासीदास जी ह अपन पूरा जीवन समाज के भलाई अऊ अंधविश्वास ल दूर करे म लगा दीन। छत्तीसगढ़ के मनखे मन आज भी उनला बड़े श्रद्धा से सुमिरथे अऊ हर साल उनकर जनम जयंती 18 दिसंबर ल बड़े धूमधाम से मनथे। उनकर संदेश आज भी प्रासंगिक हे, जऊन हमन ल सत्य, समानता अऊ भाईचारा के रद्दा म चले के सीख देवथे।


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