सोनहा बिहान के सपना ल जीवंत करइया कलावंत दाऊ महासिंह चंद्राकर
Dau Mahasingh Chandrakar
छत्तीसगढ़ी संस्कृति, लोककला अउ नाचा-गम्मत के जऊन गौरवशाली इतिहास हे, ओकर चमकदार अध्याय म दाऊ महासिंह चंद्राकर के नाम स्वर्णाक्षर म लिखाय जाही। 28 अगस्त 1997 के दाऊ जी ये संसार ला छोड़ गिन, फेर वोमन अपन रचना, अपन कला अउ अपन समर्पण ले आज घलो जिन्दा हवंय।
छत्तीसगढ़ी संस्कृति के स्वर्णकाल Golden period of Chhattisgarhi culture
सन् 1970-80 के दशक ला छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक मंच के सोनहा बेरा कहे जाथे।
- ‘चंदैनी गोंदा’ अउ ‘कारी’ के माध्यम ले दाऊ रामचंद्र देशमुख जी नेंव रखिन।
- ‘सोनहा बिहान’ अउ ‘लोरिक चंदा’ के माध्यम ले दाऊ महासिंह चंद्राकर जी ये नेंव म महल-अटारी बना दिस।
मंच के सुग्घर दिन ला देखइया हर मनखे जानथे – ए दूनों कलाकार ह छत्तीसगढ़ी म गंगा-यमुना बरोबर रिहिन।
जीवन परिचय Dau Mahasingh Chandrakar Biography
- जन्म : 19 मार्च 1919, ग्राम आमदी (जिला दुर्ग)
- पिता : दाऊ रामदयाल चंद्राकर
- शिक्षा : प्राथमिक आमदी, बाद मं दुर्ग। पढ़ाई छोड़ कला मं जुड़ गे।
- बचपन : कला संग जुड़ाव बचपन ले रिहिस।
- स्वर्गवास: 28 अगस्त 1997
- संगीत : दाऊ जी तबला, हारमोनियम म दक्षता हासिल करिन, अउ बाद मं 1964 म प्रयाग संगीत समिति इलाहाबाद ले तबला म डिप्लोमा घलो लेइन।
‘सोनहा बिहान’ – सपना ले हकीकत तक
सन् 1974 मं ग्राम ओटेबंद म पहला प्रदर्शन होइस। ‘सोनहा बिहान’ डॉ. नरेंद्रदेव वर्मा के उपन्यास सुबह की तलाश ऊपर आधारित रिहिस। ए मंच ले पहिली बेर प्रस्तुत होइस अमर गीत – “अरपा पइरी के धार”, जऊन आज छत्तीसगढ़ राजगीत बने हावे। दाऊ जी डॉ. नरेंद्रदेव वर्मा ला 'नरेंद गुरुजी' कहे करत रहिन। वोमन कहिथें– “नरेंद मोर गुरु, सलाहकार अउ बोली-भाखा सब रिहिसे।”
कला यात्रा अउ योगदान
दाऊ महासिंह चंद्राकर जी ‘लोरिक चंदा’ अउ ‘लोक रंजनी’ के कार्यक्रम संग छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा तक छत्तीसगढ़ी कला के झंडा लहराइन। वो मन हर मंच मं साहित्यकार मन के सम्मान करके ही कार्यक्रम प्रस्तुत करिन – जे ह छत्तीसगढ़ी संस्कृति मं अद्भुत परंपरा गढ़िस। उंकर कहना रिहिस – “मैं एक हाथ म सरस्वती अउ एक हाथ म लक्ष्मी ल लेके चलथौं, तेनच ये सब संभव हो पाथौं।”
28 अगस्त – पुण्यतिथि के दिन
दाऊ महासिंह चंद्राकर जी 28 अगस्त 1997 मं हम सब ला छोड़ गिन। आज उंकर पुण्यतिथि मं हम सब झन उंकर ला श्रद्धांजलि अर्पित करत हन। वो ह सिरिफ एक कलाकार नई, बल्कि छत्तीसगढ़ी संस्कृति के अमिट पहचान रिहिन।
🌸🙏 **जोहार दाऊ महासिंह चंद्राकर** 🙏🌸
- दाऊ महासिंह चंद्राकर
- सोनहा बिहान
- लोरिक चंदा
- छत्तीसगढ़ी लोककला
- अरपा पइरी के धार
- छत्तीसगढ़ी संस्कृति के कलाकार
- छत्तीसगढ़ी राजगीत
- नरेंद्रदेव वर्मा सोनहा बिहान
- छत्तीसगढ़ की विभूतियां
- छत्तीसगढ़ के महापुरूष
मूल लेखक- श्री सुशील भोले
परिमार्जन- जयंत साहू
चित्रांकन- एआई
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