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अलहड़ ददरिया अउ गमकत लोकधुन म सजे शानदार मया के गीत : कनिहा म मोर करधन


छत्तीसगढ़ी लोककला म जब-जब कोनो दाग लगिस ओला धोवे खातिर संस्कारधानी राजनांदगांव के माटी ले उपजे हीरा मन फरिहर करे के सुघ्घर उदीम करिन। येला लोकमंच के सर्जक दाऊ रामचंद्र देशमुख जी के ही पुन परताप केहे जाए के राजनांदगांव अंचल के युवा कलाकार मन तको छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कला-संस्कृति ल आरूग राखे के बाना ऊंचाये हावय। छत्तीसगढ़ी संगीत म नागपुरी, संबलपुरी, मराठी, भोजपुरी अऊ न जाने का-का के खधवन के बीच, आरूग गीत सुने बर चोला तरसथे त ‘कनिहा म मोर करधन अउ पांव म साटी मोर’ जइसे अलहड़ ददरिया अउ गमकत लोकधुन म सजे शानदार मया के गीत गुंजथे।

पीटीएफ स्टूडियो यूट्यूब चैनल म अपलोड होए सुघ्घर पारंपरिक छत्तीसगढ़ी गीत ‘कनिहा म मोर करधन’ के गीत, संगीत अउ प्रस्तुतिकरण बहुत ही शानदार हावय। बहुत दिन बाद अइसे कोनो गीत सुने अउ देखे बर मिलिस जेन ह मन ला गउकिन मताके रख दिस। ददरिया विधा के मयागीत के शब्द रचना जयवंत जंघेल के अउ येकर धुन बनाये हावय श्रद्धेय धुरवाराम मरकाम। अपन दौर के खाटी कलाकार धुरवाराम मरकाम जेकर गीत आज भी रेडियो म गुंजथे। छत्तीसगढ़ म ददरिया ल संगीत म बांधे के जेन बुता केदार यादव अउ धुरवाराम मरकाम मन करिन अबके म वो बात नइ दिखे। मोर दावा हावय के जेन भी कलाप्रेमी ‘कनिहा म मोर करधन’ गीत ल सुनही वो गीत अउ संगीत के बढ़ई करे बिगर नइ रेहे सके। 

जयवंत जंघेल के गीत ल मधुर स्वर म गाये हावय अंचल के लो‍कप्रिय गायिका शिवानी जंघेल अउ छत्तीसगढ़ी सिनेमा के पार्श्व गायक सुनील सोनी। शिवानी अउ सुनील के खनकत आवाज सोज्झे हिरदे म उतरथे, घेरी-बेरी सुने के मन करथे। भाव भी कुछ अइसे हावय के, मेछरावत टूरा-टूरी नहीं बल्कि नायक-नायिका या पति-पत्नी के साफ-सुथरा मया ल परगट करे गे हावय। ...का मोहनी डारे ना, जा लहरिया मोर... के उड़ान गउकिन करेजा चिर देथे। ददरिया के ये सबले बड़का खासियत होथे के मया करइया मन अपन मयारू ल जोड़ीदार, लहरिया, सांवरिया, जवांरा, बइहा, बेलबेलहा, संवरेगी, पतरेंगी, कजरेली जइसे संबोधन ले आरो करथे। अइसन काबर केहे जाथे वो बात ल आन वीडियो के समीक्षा म करबोन।

खैर ये तो सोशल मीडिया के दौर आए केहे जाथे के इंहा जेन दिखथे तिही बिकथे, माने सुनाये के संग देखाये म जादा भरोसा होथे। ‘कनिहा म मोर करधन’ म मोर पसंदीदा कलाकार प्रताप जंघेल अउ धनलक्ष्मी साहू मन भावाभिनय करे हावय। प्रताप अउ धनलक्ष्मी दुनों ल छत्तीसगढ़ी पहनावा गजब फबथे, अऊ गीत ल निभाथे घलोक सुघ्घर अकन। पुष्कर साहू, सुमीत अउ तुषार सोलंकी के टीम ह बहुत ही शानदार तरीका ले येकर फिल्मांकन करे हावय जेला रायपुर के महादेव घाट के अलावा कई लोकेशन म शूट करे गे हावय। प्रताप अउ धनलक्ष्मी के अभिनय अउ स्क्रीनप्ले बढि़या तइयार करे गे हावय, लेकिन अऊ बढि़या हो सकत रिहिस। 

गीत ल अतका दर्शक मनके मया दुलार मिलत हावय त निश्चित ही अवइया दिन म अइसने अऊ मया भरे गीत देखे सुने बर मिलही। काबर के 21वीं सदी के छत्तीसगढ़ अउ सोशल मीडिया के दौर म आरूग कर्मा-ददरिया के तान बिरले कोनो कलाकार ह छेड़थे। ये काहन के अब छत्तीसगढ़ी सिनेमा के दौर म हम पारंपरिक विधा ल पाछु छोड़ आये हाबन। तब भी गीत-संगीत मनोरंजन रिहिस अब भी हावय, फरक व्यवसायीकरण के होइस। अइसे बखत म ‘कनिहा म मोर करधन’ असन पारंपरिक गीत के आना बहुत ही अच्छा संकेत आए। बहरहाल पुष्कर साहू, शिवानी जंघेल, सुनील सोनी, धुरवाराम मरकाम, प्रताप जंघेल, धनलक्ष्मी साहू, जयवंत जंघेल, सुमीत, विनय संग तुषार सोलंकी अउ उंकर पूरा टीम ल फेर एक पइत हमर डहर ले गाड़ा-गाड़ा बधाई।       

गीत - कनिहा म मोर करधन 

  • लड़की - कनिहा म मोर करधन अउ पांव म साटी मोर, मुड़ म बोहे गघरी हिरनी कस आंखी मोर, येमा का मोहनी डारे ना, का मोहनी डारे ना, जा लहरिया मोर...  
  • लड़का - कनिहा म तोर करधन अउ पांव म साटी तोर, मुड़ म बोहे गघरी हिरनी कस आंखी तोर, येमा का मोहनी डारे वो, का मोहनी डारे ना, जा लहरिया तोर...
  • लड़की - आधा सरगनी कोड़े ल भरही न, हाय रे हाय रे कोड़े ल भरही ना, मोर जवानी के कलपना जवांरा तुही ल परही ना...
  • लड़का- का कर डारेव काखर बुध म ना, हाय रे हाय रे काखर बुध ना, अन पानी ल तियागेव जवांरा काखर सुध म ना...
  • लड़की- आमा के डारा लहस भइगे ना, हाय रे हाय रे लहस भइगे ना
  • लड़का- काली के अवइया जवांरा बरस भइगे ना...

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