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बस्तर के काजू ह कोरोना राई के बेरा म तको बढ़ावत हाबे वनवासी परिवार के आमदनी

बस्तर.24। संकट काल म वनांचल म रहइया परिवार के आमदनी बढ़ाये हाबे इहां के सुवाद भरे काजू ह। नए स्वरूप म पैकेजिंग अउ बस्तर ब्रांड नेम ले येकर लांचिंग मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ह हाल म ही करे हावय। बस्तर के स्वादिष्ट काजू के मांग ल देखत येला वन विभाग के संजीवनी स्टोर्स म उपलब्ध कराये गे हावय। राज्य सरकार ह वनांचल के लोगन ल वनोत्पाद के जरिए रोजगार उपलब्ध कराये के मुहिम के चलत जिहां फेर ले बंद पड़े काजू प्रसंस्करण ल शुरू करे हाबे उहें काजू के समर्थन मूल्य म वृद्धि तको करे गे हावय। 

बस्तर के जलवायु ल काजू खातिर अनुकूलता ल देख वन क्षेत्र म सत्तर के दशक म काजू के पौधा लगाये गे रिहिसे। फेर वृक्षारोपण के बाद येकर संग्रहण खातिर कोनो मेकेनिजम नी बनाये अऊ न ही प्रसंस्करण कोति ले धियान दे गे रिहिस। जेकर सेती इहां के काजू ज्यादातर निकटवर्ती ओडि़शा प्रदेश म बिचौलिया के माध्यम ले बेचे जाए, काजू के उचित मूल्य नी मिल पात रिहिसे। वर्तमान म बस्तर म लगभग 15 हजार हेक्टेयर भूमि म काजू के सफल वृक्षारोपण विद्यमान हावय, जेकर उत्पादन क्षमता 10-12 हजार क्विंटल हावय। 

राज्य सरकार ह वनवासी मनला अतिरिक्त आय देवाये खातिर बकावंड के वनधन विकास केन्द्र म बंद पड़े काजू प्रसंस्करण इकाई ल फेर शुरू करे हाबे। एसो काजू के समर्थन मूल्य ल बढ़ाके 100 रूपिया प्रति किलो करे ले कोरोना संकट काल म ओमन ल रोजगार मिलत हाबे। प्रसंस्करण कार्य ले क्षेत्र के महिला मनला 8 महीना तक सरलग रोजगार मिलही। अऊ प्रति परिवार ल लगभग 60 हजार रूपिया आय संभावित हावय।

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