Home News Contact About
'अंजोर ' छत्तीसगढ़ी मासिक पत्रिका वेब संस्करण ---- anjore.cg@gmail.com

अजय शेखर 'नैऋत्य' के छत्तीसगढ़ी कविता : तन हे धन


जिहाँ मोल नइहे ये दुनिया म, त तोल कोन करय।
नइ करें  भाव बियाना, अऊ झोली कोनो नइ भरय।।

होवत हे बिहान फेर, हजाये मति सचेत नइ पावय।
पिसान के संगे म, किरा कस चिक्कन रमजावय।।

उपरछावा कठवा हे तन, हिरदे हे खुरहोरी,मीठ पानी।
कब गुनबे नोहर तन ल, करेजा होही जब चानी चानी।।

परकबारी बन गेहे तोर तन, मन बोलय जइसन माने।
अबुजहा गरब गुमान में, फोकट उपराहा सेखी ताने।।

धरम करम ल छोड़ के, उफनात भँवर में डुबकी लगाये।
मँदरस जस बानी छोड़ के, अरई में हुदरे सही गोठियाये।।

पाप भरे तन-मन म, दया-मया अऊ सेवा ल नई जाने।
बन जा मानुस चंदन रे, माथ अंगरी ल खुशबू म रे साने।।

रचनाकार-
अजय शेखर 'नैऋत्य'
पता- अमलोर, सिरपुर महासमुंद

No comments:

Post a Comment

जोहार पहुना, मया राखे रहिबे...

किस्सा कहिनी

Contact Us

Name

Email *

Message *

कला-संस्कृति-साहित्य

follow us

T-Twitter | F-Facebook | Y-Youtube | Instagram | Pinterest
महतारी भाखा के उरउती खातिर भारत के समाचार पत्र के पंजीयक कार्यालय नई दिल्ली म पंजीकृत ' अंजोर ' छत्तीसगढ़ी मासिक पत्रिका के anjor.online वेब संस्करण म छत्तीसगढ़ी बुलेटिन, किस्सा-कहानी अउ कला-मनोरंजन संग सोशल मीडिया के चारी, कुछ आन भाखा के अनुवाद समोखे, छत्तीसगढ़ के जन भाखा म जन-जन तक बगराथन। जुड़व ये उदीम - anjore.cg@gmail.com

सियानी गोठ