कभू पारंपरिक (पुरखा के जमाना के) खेती तक सीमित रहइया जशपुर ह अब नाशपाती उत्पादन बर नवा पहिचान बनावत हे। पहाड़ अउ हरियाली ले घिरे ए आदिवासी अंचल के नाशपाती ह अब छत्तीसगढ़ के सीमा ला पार कर दिल्ली, उत्तरप्रदेश अउ ओडिशा जइसन बड़े-बड़े बाजार मन तक पहुंचत हे। जिला के हजारों किसान मन बर नाशपाती के खेती ह आज आर्थिक रूप ले संपन्न बने के बड़ साधन बन गे हे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के अगुवाई म किसान मन ला फल के खेती कोती बढ़ावा देहे के कोसिस के असर अब भुइँया म साफ दिखत हे। उद्यान विभाग अउ READS NGO (रूरल एजुकेशन एंड डेवलपमेंट सोसायटी) कोती ले नाबार्ड के सहयोग संग किसान मन ला आधुनिक बागवानी बर उसाह बढ़ाए जावत हे। एही कारन आय कि जशपुर जिला म नाशपाती उत्पादन के दायरा ह लगातार बढ़त जावत हे।
अभी के बखत म जिला के लगभग 3,500 किसान मन ह करीब 3,500 एकड़ म नाशपाती के खेती करत हें। ए बगीचा मन ले हर बछर लगभग 1 लाख 75 हजार क्विंटल नाशपाती के पैदावार होवत हे। जिला के सन्ना, पंडरापाठ, कंवई, महुआ, सोनक्यारी, मनोरा, धवईपाई अउ गीधा जइसन पहाड़ी इलाका मन म बड़ पैमाना म नाशपाती के बगीचा मन ला तैयार करे गे हे।
ए इलाका मन ले तइयार नाशपाती ला कैरेट (पेटी) म पैक कर के सीधे दूसर राज के बाजार मन म भेजे जाथे। जशपुर के नाशपाती ह अपन सवाद अउ क्वालिटी के सेती बियोपारी मन के पहली पसंद बनत जावत हे। किसान अउ बियोपारी मन के कहना हे कि बाहरी राज मन म एखर मांग ह लगातार बढ़त हे।
नाशपाती के खेती ह किसान मन बर फायदा के सौदा साबित होवत हे। किसान मन ला प्रति एकड़ बछर दिन म एक लाख ले डेढ़ लाख रुपिया तक के कमाई होवत हे। एखर ले गांव-गवई के आर्थिक स्थिति ह मजबूत होय हे अउ कतको किसान मन पारंपरिक खेती ला छोड़ के फल उगाय कोती खिंचे चले आवत हें।
उद्यान विभाग के सहायक संचालक ह बताइन कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत किसान मन ला नाशपाती क्षेत्र बढ़ाए बर मदद अउ उसाह दिए जावत हे। किसान मन ला पौधा लगाना, तकनीकी जानकारी अउ ट्रेनिंग दिए जावत हे, ताकि ओमन आधुनिक तरीका ले अउ बढ़िया उत्पादन पा सकें। जशपुर के नाशपाती ह अब सिर्फ एक ठन फल नो हे, बल्कि किसान मन के मिहनत, आतमनिर्भरता अउ बदलत गांव के अर्थव्यवस्था के नवा पहिचान बनत जावत हे।


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