कोलकाता/दिल्ली: भारतीय राजनीति के इतिहास में हार-जीत के कतको दिलचस्प किस्सा दर्ज हे, फेर साल 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव हा एक नवा अउ चुरपुर-ननूछूर अध्याय जोड़ दिस हे। राजनीति के माहिर खिलाड़ी मन अब तक जीत के श्रेय पसीना, बड़का रैली अउ चुनावी प्रबंधन (Booth Management) ला देवत रहिन, फेर बंगाल के नतीजा मन हा विशेषज्ञ मन ला अपन किताब फेर ले लिखे बर मजबूर कर दे हे। गलियारा में अब चर्चा गृहमंत्री के रणनीति के नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डाहर ले प्रचार के बखत खाये ओ 'झालमुड़ी' के होवत हे, जेहा देखत-देखत सत्ता के चाबी ला भाजपा के झोली में डाल दिस।
10 रूपिया के ओ जादुई दोना अउ विपक्ष के 'चुरपुर' तंज
चुनाव प्रचार जब अपन चरम में रहिस अउ बयान मन के गरमी बाढ़त रहिस, त प्रधानमंत्री के एक छोटे से दुकान में रुक के 10 रूपिया के झालमुड़ी खाना राष्ट्रीय खबर बन गे रहिस। ओ बखत मानों पूरा भारत के सियासत ओ कागज के दोना में सिमट के गे रहिस। विपक्ष हा ए मौका ला हाथ ले जाए नइ दिस अउ जमके ठहाका लगाइस। सोशल मीडिया में मीम्स के बाढ़ आ गे रहिस अउ तंज कसे गिस कि "बंगाल में दाल नइ गल पावत हे, ए सेती प्रधानमंत्री हा मुड़ी चबा के काम चलावत हें"। तीखा झालमुड़ी ला भाजपा के 'तीखा हार' के संकेत बताय जावत रहिस, फेर नतीजा मन हा साबित कर दिस कि ओ 10 रूपिया के झालमुड़ी ह असल में एक 'चुनावी टॉनिक' रहिस।
डाइट प्लान बदलिस: अब हर हाथ में दोना, हर मुँह में झालमुड़ी
जीत के बाद भाजपा के नजारा पूरा बदल चुके हे। जे नेता अउ मंत्री मन कल तक अपन सेहत अउ डाइट चार्ट ला लेके बहुत चिंता करत रहिन, आज ओ मन सरेआम झालमुड़ी चबात अउ ओखर आनंद लेवत नजर आवत हें। अब भाजपा में झालमुड़ी सिर्फ एक नाश्ता नई, बल्कि 'चुनावी प्रसाद' बन गे हे, जेला कार्यकर्ता मन के बीच बड़े उत्साह ले बांटे जावत हे। पार्टी के 'वार रूम' (War Room) के माहौल घलो बदल गे हे; जहाँ पहिली समोसा अउ कचौड़ी मन के दौर चलत रहिस, अब ओती सिर्फ 'मुड़ी' के ही बोलबाला हे। कार्यकर्ता मन के बीच ए बिसवास पक्का हो गे हे कि एही ओ 'लकी चाम' हे जेहा बंगाल के अभेद्य किला ला जीते में मदद करिस हे।
भविष्य के रणनीति: का झालमुड़ी बनही नवा चुनावी फॉर्मूला?
बंगाल के जीत के बाद भाजपा खेमा में उत्साह के पारा चढ़े हुए हे। अब दबी जुबान में पार्टी के भीतर नवा 'चुनावी मॉडल' ऊपर चर्चा सुरू हो गे हे। कहे जावत हे कि आवइया समय में देश के कूनो भी राज्य में चुनाव होवय, भाजपा के सबले पहिली काम ओती के स्थानीय अउ सबले मशहूर 'चटपटा मुड़ी' के दुकान मन के मैपिंग करना होही। रणनीतिकार मन के मानना हे कि यदि जीत के रद्दा अतका सस्ता अउ सुवाद वाले माध्यम ले हो के गुजरथे, त भारी-भरकम तामझाम अउ करोड़ों के खरचा वाले प्रचार के का जरूरत? झालमुड़ी अब भाजपा बर सिर्फ भोजन नई, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक हथियार बन चुके हे।
विपक्ष के खामोशी अउ जीत के तीखा अहसास
कल तक जो विपक्षी नेता झालमुड़ी ऊपर चुटकुला सुनावत रहिन अउ हंसी उड़ावत रहिन, आज नतीजा के बाद ओखर चेहरा में सन्नाटा पसरे हे। दूसरा कोती, भाजपा के दिग्गज नेता अब ओही झालमुड़ी के दोना हाथ में धर के विरोधी मन ला चुनावी हार के सुवाद चखावत हें। पार्टी के संदेश बिल्कुल साफ हे- "सुवाद घलो हमर हे अउ जनादेश घलो हमर हे"। राजनीतिक विश्लेषक मन बर अब ए देखना बहुत दिलचस्प होही कि का 'झालमुड़ी मॉडल' के ए करिश्मा दूसरा राज्य मन में घलो दोहराय जा सकही, या फेर ए चमत्कार सिर्फ बंगाल के माटी अउ ओती के मुरमुरे के जादुई मेल के ही फल रहिस।


सबो पाठक ल जोहार..,
हमर बेवसाइट म ठेठ छत्तीसगढ़ी के बजाए रइपुरिहा भासा के उपयोग करे हाबन, जेकर ल आन मन तको हमर भाखा ल आसानी ले समझ सके...
छत्तीसगढ़ी म समाचार परोसे के ये उदीम कइसे लागिस, अपन बिचार जरूर लिखव।
महतारी भाखा के सम्मान म- पढ़बो, लिखबो, बोलबो अउ बगराबोन छत्तीसगढ़ी।