छत्तीसगढ़ बिधानसभा म 'छत्तीसगढ़ धरम स्वातंत्र्य विधेयक, 2026' पास हो गे हे। सरकार ह जबरन अउ लालच म करात धरम बदलाव ला रोके बर ये कड़ा कदम उठाए हे। अब हमर छत्तीसगढ़ म धोखा देके या डरा-धमका के कोनो के धरम नई बदलवा सकय। ये बिल ह अब कानून के रूप लेवत हे, जेखर से परदेस के संस्कृति अउ मान-मर्यादा ला बचाए के कोसिस करे जावत हे।
सदन म जइसे ये बिल पास होइस, सत्ता पक्ष के विधायक मन खुसी म झूम उठे अउ 'जय श्री राम' के नारा लगाइन। माहौल एकदम गरम रिहिस। एक कोति भाजपा ह एला ऐतिहासिक निर्णय बतावत हे, त दूसर कोति कांग्रेस ह एकर कड़ा बिरोध करिस अउ सदन ले बाहिर (वॉकआउट) निकल गे। बिपक्ष के कहना हे कि ये बिल के आड़ म राजनीति करे जावत हे, जबकि सरकार एकर जरूरत ला जरूरी बतावत हे।
ये नवा कानून म सजा के अइसन प्रावधान हे कि सुन के अपराधी मन के रूह कांप जाही। अगर कोनो सामूहिक धर्मांतरण (याने बहुत झन ला एक साथ) अवैध तरीका ले करही, त ओला आजीवन कारावास यानी उमर भर बर जेल के हवा खाना पड़ही। सरकार ह साफ कह दे हे कि अब छत्तीसगढ़ म छल-कपट ले कोनो ला बहला-फुसला के ओखर धरम नई बदले जा सकय।
विधेयक म ये बात घलो लिखे गे हे कि अब धरम बदलई के खेल डिजिटल माध्यम ले घलो नई हो सकय। अगर कोनो मोबाइल, सोशल मीडिया या कोनो अउ ऑनलाइन तरीका ले गलत जानकारी देके धरम बदलवाथे, त ओला घलो सख्त सजा मिलही। ये अपराध अब 'संज्ञेय अउ गैर-जमानती' होही, मतलब पुलिस ह बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकही अउ जेल ले छूटना घलो मुस्किल हो जाही।
सरकार के मानना हे कि गरीब अउ सीधा-साधा मनखे मन ला प्रलोभन (लालच) देके ओ मन के धरम ला बदलवाए जावत रिहिस। ए बिल के आए ले अइसन गिरोह मन ऊपर लगाम कसाई। अब कोनो ला घलो धरम बदले के पहिली जिला प्रशासन ला सूचना देना होही, ताकि ये पता चल सके कि ओ ह अपन मर्जी ले करत हे या कोनो के दबाव म आके।
कुल मिला के, छत्तीसगढ़ बिधानसभा म ये बिल ध्वनि मत ले पास होगे हे। एला लेके परदेस के कोना-कोना म चरचा होवत हे। कोनो एला सही कहत हे त कोनो एला राजनीति ले जोड़ के देखत हे। खैर, अब ये कानून ह छत्तीसगढ़ के धरती म कइसन असर देखाहि, ये ह त आने वाला समय म ही पता चलही।

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