छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग म पाछू सात बछर ले खाली पड़े अध्यक्ष के कुरसी ला आखिर म अब ओखर मालिक मिलगे। छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग डाहर ले जारी करे गे आदेश के मुताबिक, प्रभात मिश्रा ला छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के नवा अध्यक्ष नियुक्त करे गे हे। सात साल ले ए पद ह सूना पड़े रहिस, जेखर ले हमर भाखा-बोली अउ साहित्य के संवर्धन के काम मन म एक किसम के ठहराव आ गे रहिस। अब प्रभात मिश्रा जी के नियुक्ति ले आयोग ला नवा सुग्घर नेतृत्व मिले के उम्मीद जागे हे।
बता दन कि कांग्रेस के पिछला सरकार म पूरा पांच बछर तक राजभाषा आयोग म कोनो अध्यक्ष नइ बनाय गिस। ओ बखत के सरकार ह आयोग ला संस्कृति परिषद के अधीन मान के एकर स्वतंत्र पहचान ला लगभग खत्म कर दे रहिस। साहित्यकार अउ भाखा प्रेमी मन ए बात ले बहुते दुखी रहिन कि सरकार ह कोनो ला ए पद के लइक नइ समझिस। नतीजा ए होइस कि छत्तीसगढ़ी भाखा ला राजकाज म जोड़े के जतका भी अभियान रहिस, ओ सब ठप पड़ गे रहिस।
अब जब प्रदेश मा भाजपा के सरकार हे, त शुरू ले ही उम्मीद रहिस कि राजभाषा आयोग म फेर ले रौनक आही। हालांकि, ए सरकार ला घलो छत्तीसगढ़ी भाखा के सुध ले म अउ प्रभात मिश्रा ला जिम्मेदारी सउंपे मा लगभग दो बछर के बखत लग गे। देर ले ही सही, कम से कम सरकार ह अब आयोग के सुध त लीस। प्रभात मिश्रा जी के ऊपर अब ए बड़े जिम्मेदारी हे कि ओ मन छत्तीसगढ़ी भाखा ला ओखर वाजिब सम्मान अउ हक देवाए बर काम करहीं।
अब सबो के नजर ए बात ऊपर टिके हे कि प्रभात मिश्रा जी के आए ले छत्तीसगढ़ी भाखा के विकास मा छाये 'अंधेरा' कतका दूर होही। पिछले सात साल ले आयोग ह जउन सुस्त पड़ गे रहिस, ओला फेर ले गति देना अउ छत्तीसगढ़ी ला शिक्षा अउ सरकारी कामकाज के भाखा बनाना नवा अध्यक्ष बर बड़े चुनौती होही। भाखा प्रेमी मन ला भरोसा हे कि प्रभात मिश्रा अपन अनुभव ले हमर महतारी भाखा छत्तीसगढ़ी ला नवा ऊँचाई तक पहुंचाहीं।


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