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| छत्तीसगढ़ी लोक कला के अनमोल रतन: श्रीमती रेखा देवार के जीवन-गाथा |
माटी के महक अउ देवार कला के परंपरा छत्तीसगढ़ के माटी मा अइसन जादू हे कि इहां के कतरा-कतरा मा संगीत बसे हावय। इहां के कतकोन घुमंतू जाति मन मा 'देवार' समुदाय के एक अलग अउ ऐतिहासिक महत्व हे। ए समुदाय ह अपन गायकी, नाच अउ घूम-घूम के मनोरंजन परुसे बर जाने जाथे। आज जब हम देवार कला के गोठ करथन, त एक नाम सबले ऊपर आथे- श्रीमती रेखा देवार। रेखा जी ह न केवल अपन पुरखा मन के विरासत ला सँभाले हें, भलुक ओला ओ ऊंचाइन तक पहुँचाए हें, जहाँ आज पूरा देश ओमन ला 'पद्मश्री' के हकदार मानत हे।
1. अभाव अउ संघर्ष मा बीते बचपन
रेखा देवार जी के जनम 1 जनवरी 1973 के मुंगेली जिला के एक छोटे कन गांव 'कुकुसदा' मा होइस। ओकर दाई के नाम स्वर्गीय थनवरिन देवार अउ ददा के नाम स्वर्गीय दशरथ देवार रहिस। देवार परिवार के परंपरा के मुताबिक, ओकर बचपन कोनो पक्का घर मा नहीं, भलुक टेंट (डेरा) मा बीतिस। गरीबी अइसन रहिस कि शिक्षा के सपना देखना घलो मुश्किल रहिस। लइकापन मा ओहा अपन आजी (दादी) ला देखके गीत गुनगुनाय अउ नाचे बर धरिस। ओ समय पेट भरे बर रेखा जी ला गली-गली भीख घलो मांगे बर पड़िस, फेर ओकर भीतर के कलाकार कभू नहीं हारिस।
2. कला जगत मा प्रवेश अउ 'नवा अंजोरी' के साथ
रेखा जी के प्रतिभा मा अइसन चमक रहिस कि पड़ोसी गांव पथरिया के मंझे हुए कलाकार लक्खा देवार के नजर ओकर ऊपर पड़ीस। लक्खा देवार ह ओला अपन टोली मा रख लीस। रेखा ह करीब 3 साल तक मध्य प्रदेश के मंडला अउ आस-पास के इलाका मा डेरा डार के कला परुसिस।
फेर, रेखा जी के जीवन मा असली बदलाव साल 1984 मा आइस, जब ओमन 'नवा अंजोरी' सांस्कृतिक समूह मा शामिल होइन। ए ग्रुप के मार्गदर्शक विजय सिंह जी रहिन। विजय सिंह जी ह रेखा के भीतर छिपे असली कलाकार ला पहिचानिन। ओमन रेखा ला न केवल संगीत के बारीकी सिखाइन, भलुक एक अनपढ़ लइका ला अक्षर ज्ञान देके साक्षर घलो बनाइन। आगे चलके रेखा अउ विजय सिंह जी बिहाव के पवित्र बंधन मा बंध गीन।
3. देवार कला के 'शुद्धता' के प्रतीक
आज के जुग मा जब लोक कला मन मा कीबोर्ड, ड्रम अउ पाश्चात्य बाजा मन के मिलावट हो गे हे, रेखा देवार जी ह अपन कला ला 'शुद्ध' रखे हें। ओमन आज घलो केवल पारंपरिक देवार बाजा (रुन्झु, डफली अउ सारंगी) के ही प्रयोग करथें। ओकर गायकी मा:
देवार कर्मा: जेमा देवार जाति के खास लय अउ ताल होथे।
लोक गाथा: पंडवानी, भरथरी, चंदेनी, दसमंत कैना, नगेसर कैना अउ ढोला-मारू जइसन कठिन गाथा मन ला रेखा जी ह अपन सुग्घर आवाज मा परुसथें।
विशिष्ट उच्चारण: देवार मन के छत्तीसगढ़ी बोले के तरीका (एक्सेंट) अलग होथे, रेखा जी आज घलो ओही मौलिकता ला बचा के रखे हें।
4. 40 साल के साधना अउ 4000 ले जादा मंच प्रस्तुति
रेखा देवार जी ह पिछले 41 साल ले लगातार मंच मा सक्रिय हें। ओमन छत्तीसगढ़ के कोना-कोना (रायपुर, बिलासपुर, बस्तर, रायगढ़) मा तो अपन कला देखाइन ही, संगे-संग दिल्ली, लखनऊ, भोपाल, जयपुर, इलाहाबाद जइसन बड़े शहर मन मा घलो छत्तीसगढ़ी संस्कृति के झंडा गाड़िन।
प्रमुख आयोजन: चक्रधर समारोह, राजिम कुंभ, राज्योत्सव, अउ संगीत नाटक अकादमी के 'देशज' जइसन प्रतिष्ठित महोत्सव मन मा ओमन अपन प्रस्तुति दे चुके हें।
रिकॉर्डिंग: ओकर नाम ले कतकोन ऑडियो-वीडियो सीडी अउ डीवीडी जारी हो चुके हें। 'सहपीडिया' जइसन अंतर्राष्ट्रीय संस्था ह ओकर कला के दस्तावेजीकरण करे हावय।
5. शोध अउ अकादमिक महत्व
रेखा देवार जी छत्तीसगढ़ के अइसन पहिली लोक कलाकार हंय, जेकर ऊपर गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय मा शोध (PhD) करे गे हे। 'देवारों की लोक गाथाएं' नाम के किताब मा ओकर कला अउ जीवन के विस्तृत वर्णन हे। ये बात साबित करथे कि रेखा जी केवल एक कलाकार नहीं, भलुक एक 'जीवंत संस्था' (Living Institution) हंय।
6. महिला सशक्तिकरण के जीयत-जागत मिसाल
तीन साल पहिली विजय सिंह जी के शांत होय के बाद, रेखा जी के ऊपर दुखों के पहाड़ टूट पड़ीस। फेर ओमन हिम्मत नहीं हारिन। ओमन न केवल अपन परिवार ला सँभालिन, भलुक अपन टोली के कलाकार मन ला घलो सहारा दीन। पति के देहांत के बाद के 3 साल मा ओमन 200 ले जादा सफल कार्यक्रम देके ये बता दीन कि एक कलाकार कभू हार नहीं माने।
7. पद्मश्री बर नामांकन अउ छत्तीसगढ़ के मान
साल 2026 बर रेखा देवार जी ला पद्मश्री बर नामांकित करे हे। ये सम्मान ओकर ओ 40 साल के तपस्या के फल आय, जेमा ओमन अपन समुदाय के लुप्त होवत कला ला जिन्दा रखे हें।
उपलब्धि अउ पुरस्कार के एक झलक:
दाऊ मंदराजी राज्य सम्मान (2021)
दाऊ महासिंह चंद्राकर सम्मान (2010)
बिलासा कला सम्मान (2005)
सांस्कृतिक दूत अवार्ड (2013)
रेखा देवार जी के कहानी 'शून्य ले शिखर' तक पहुँचे के कहानी आय। एक अइसन महिला जेहा भीख मांगिस, टेंट मा रहिस, अनपढ़ रहिस, फेर अपन मेहनत अउ गला के जादू ले आज 'पद्मश्री' के दहलीज मा खड़ी हे। ओहा छत्तीसगढ़ी अस्मिता अउ देवार संस्कृति के असली पहिचान आय। हम सबो छत्तीसगढ़िया मन के ये गौरव आय कि हमर माटी के अइसन कलाकार ला दुनिया अब सलाम करत हे।


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