धर्म बनाम सत्ता: का कोनो पार्टी के भक्ति नई करना 'धरम-बिरोधी' होना आय?

अंजोर
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, जेमन ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हवय, आजकाल ओमन ल लेके बड़े बहस छिड़े हे। हमर हिंदू धरम मा शंकराचार्य के पद सबले ऊंच मानि जाथे। पर आज अजब गजब दिन आ गे हे—जेखर काम धरम के रच्छा करना हे, ओला ही कुछु लोगन मन 'धरम-बिरोधी' बतावत हंय। अउ काबर? सिर्फ एखर बर कि ओमन कोनो एक पार्टी या कोनो एक नेता के जय-जयकार नई करिन।

​भक्ति के नवा परिभाषा अउ राजनीति

​आजकल 'भक्ति' के मतलब बदल गे हे। अगर आप भगवान के भक्ति करथो पर कोनो खास नेता के पिछू नई चलो, त ओ मनखे ला धरम के दुस्मन मान ले जाथे। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी ह जब राम मंदिर के बेरा मा सास्तर के नियम के बात करिन, त सत्ता के नजीक बइठे लोगन मन ल मिर्ची लग गे।

​ओमन साफ कहिन कि धरम ह सास्तर ले चलथे, कोनो राजनीति ले नई। पर जे मनखे मन 'सत्ता के हाथ बिक चुके हंय', ओमन ल सास्तर ले कोनो मतलब नई हे, ओमन ल त बस अपन आका मन ला खुस करना हे।

​सत्ता के सुवा अउ शंकराचार्य के बिरोध

​जे मन आज शंकराचार्य के बिरोध करत हवय, असल मा ओमन धरम के रच्छक नई हंय, बल्कि सत्ता के गुलामी करत हंय।

  • बिके हुए लोग: जब कोनो संत सत्ता के गलती ला उजागर करथे, त ओ मनखे मन ल 'मिर्ची' लगना स्वाभाविक हे जेमन सत्ता के सुख भोगत हंय।
  • नवा नैरेटिव: सोशल मीडिया मा अउ टीवी मा अइसन माहौल बनाय जाथे कि अगर आप सरकार ले सवाल पूछहू, त आप ल हिंदू-बिरोधी कह दे जाही। का हमर धरम एतका कमजोर हे कि एक झन सन्यासी के सच बोले ले खतरा मा आ जाही?
  • "धरम ह कोनो पार्टी के झंडा नई आय, ये ह त सत्य के रद्दा आय। अउ सत्य बोले मा कोनो डर नई होना चाहिये।"

    का राजनीति अउ धरम एक आय?

    ​बड़का सवाल ये हे कि—का कोनो राजनीतिक पार्टी के समर्थन नई करना 'पाप' आय?

    1. पार्टी ह धरम ले बड़े नई होवय: कोनो भी पार्टी आज हे, काली नई रही। पर हमर सनातन धरम त जुग-जुगांतर ले हे। जे मन पार्टी ला धरम ले ऊपर मानथें, ओमन असल मा अधरमी हंय।
    2. सन्यासी के धरम: एक सन्यासी के काम आय राजा ला सही रद्दा दिखाना। अगर राजा गलती करही, त शंकराचार्य ओला ठोकहीं। अगर ओमन चुप हो जहीं, त ओमन अपन पद के अपमान करहीं।
    3. छत्तीसगढ़ी सियान मन के गोठ: हमर छत्तीसगढ़ मा कहे जाथे—"सच ह संसो नई करय"। स्वामी जी ह सच बोलत हंय, एखरे बर सत्ता के दलाल मन ल तकलीफ होवत हे।

    ​आखिरी बात

    ​स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी के ऊपर जे लांछन लगाय जावत हे, ओ ह हमर समाज बर बड़े सरम के बात हे। कोनो पार्टी के अंधभक्त होना धरम नई आय। असली धरम त वो हे जे सास्तर अउ सत्य के संग खड़ा होवय। जे मन आज ओमन ला 'धरम-बिरोधी' कहत हंय, ओमन असल मा सत्ता के मोह मा अंधा हो चुके हवय।

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