रायपुर। प्रवासी भारतीय दिवस के मउका म 9 जनवरी के राजधानी रायपुर म प्रवासी छत्तीसगढ़िया बंधुत्व मंच कोति ले विधानसभ अध्यक्ष निवास म संवाद, सम्मान अउ पुस्तक विमोचन के जबर जलसा के आयोजन करे गे रिहिस। कार्यकम म पहुना के रूप म प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष अउ पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास मंहत, साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा मंच म विराजमान रहिन।
विधानसभा अध्यक्ष निवास म जुरियाए पहुना मन, इतिहासकार, लेखक अउ प्रवासी छत्तीसगढ़िया मनके गरिमामयी उपस्थिति म अशोक तिवारी अउ संजीव तिवारी लिखित किताब ‘फिजी में छत्तीसगढि़या गिरमिटिया’ अउ गनपत तेली के लिखे छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह ‘मैय छत्तीसग़ढि़या असमिया’ के विमोचन करे गिस। ये मउका म 'प्रवासी छत्तीसगढ़िया बंधुत्व मंच' डहर ले ‘प्रवासी मित्र सम्मान’ ले हरनारायण शुक्ला़ (अमेरिका), रोहित साहू (असम), पुरेंद्र कुमार सिंह (झारखंड), राउल ऋषि वर्मा (अर्जेंटीना), विवेक सार्वा (महाराष्ट्र), मिलन सतनामी(असम), रूपा सिंह(असम), कृष्णा साहू (असम) अउ भरत वर्मा (झारखंड) ल सम्मानित करे गिस। गौरव शुक्ला के संचालन म इतिहासकार राहुल कुमार सिंह ह विमोचत किताब के ऊपर अपन बिचार रखत गनपत तेली के असम अउ छत्तीसगढ़ के मया गठरी खोलिस, उहें लोक सगीतज्ञ राकेश तिवारी ह ‘मैं छत्तीतसगढ़ ले आए हवं...’ गीत के माध्यम ले प्रवासी मनके सुरता के मोटरी खोलिन।
ये मउका म विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ह कार्यक्रम में कहिन के आज छत्तीसगढ़िया मन सिर्फ छत्तीसगढ़ तक सीमित नइ हें, बल्कि सात समुंदर पार घलो अपन नाम कमावत हें। ओमन कहिन- "मैं जब विदेश यात्रा में जाथंव, त उहां छत्तीसगढ़िया मन ला देख के मोला भारी गर्व होथे। अशोक तिवारी अउ ओखर संस्था ह जो डेटा तैयार करे के अउ मनखे मन ला जोड़े के बुता करत हे, ओहा बहुतेच सराहनीय हे। ए काम बर सासन-प्रसासन ले जेन मदद लगही, मैं ओला जरूर पूरा करहूं।"
कार्यकम म नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ह अपन पुरखा मन के संस्मरण साझा करत बताइन कि कइसे ओखर परदादा घलो काम-बुता के खोज में असम गे रिहिन अउ उहें बस गे रिहिन। ओमन कहिन कि अमेरिका यात्रा के बखत जब ओला अपन जांजगीर क्षेत्र के मनखे मन मिलिन, त भारी खुसी होइस। महंत जी ह जोर देवत कहिन कि अइसन प्रवासी छत्तीसगढ़िया मन ऊपर अउ जादा शोध (Research) करे के जरूरत हे।
प्रवासी भारतीय दिवस अउ जोंगे कार्यक्रम के मंच ल आरो करावत प्रवासी छत्तीसगढ़िया बंधुत्व मंच अध्यक्ष अशोक तिवारी कहिन के ओमन सरलग 8 बछर ले परदेस म बसे छत्तीसगढ़िया मन ला जोड़त हें। छत्तीसगढ़ी संस्कृति अउ छत्तीसगढ़िया मनखे मन ला एक सूत्र में पिरोय बर 'प्रवासी छत्तीसगढ़िया बंधुत्व मंच' मील के पत्थर साबित होही। ओमन छत्तीसगढ़ ले बाहिर कमाये खाए बर गए लोगन मनके सोर खबर लेवत उंकर पुरखा के नेरवा गड़े भुइंया तक पहुंचे के प्रयास करथे। असम, नागपुर, टाटा नगर के अलावा विदेश म तको कई परिवार छत्तीसगढ़ ले गे हावय। कतको लहुंट आइन अऊ कतकोन नामो निशान तको नी बांचिस। ये तो ताइहा के बात आए, फेर अब पढ़े लिखे लइका मन तको नौकरी करे खातिर दुनियाभर म छत्तीसगढ़ के सोर बगरात हाबे। तिवारी जी ह कहिन कि अब समय बदल गे हे। पहिली मनखे मजबूरी में मजदूरी करे बर बाहर जावत रिहिन, फेर अब छत्तीसगढ़ के पढ़े-लिखे अउ होनहार युवा मन अमेरिका, यूरोप अउ एशिया के बड़े-बड़े देस मन में तकनीक, शिक्षा अउ उद्योग के क्षेत्र में अपन झंडा गाड़त हें।
इही ओढ़र म पाछु बछर 'असमवासी छत्तीसगढ़िया' प्रकाशित होए रिहिसे। एसो 'फिजी में छत्तीसगढ़िया गिरमिटिया' किताब म सात समुंदार पर के देश म छत्तीसगढ़ ले मजूरी करे खातिर गए लोकन मन के आरो ले के उदीम करे गे हावय। इही संघाती असमवासी छत्तीसगढ़िया लेखक गनपत तेली के काव्य संग्रह 'मैय छत्तीसगढ़ियां असमिय' के तको विमोचन करे गिस।
अशोक तिवारी जी मन किहिन के छत्तीसगढ़ ले मनखे मन के बाहर जाय के इतिहास कतकोन पुराना हे। अंग्रेज मन के राज में, लगभग 150 बछर पहिली, बड़ संख्या में छत्तीसगढ़िया मन ला असम के चाय बागान मन में काम करे बर ले जाय गे रिहिस। आज असम में छत्तीसगढ़िया मन के सातवा-आठवा पीढ़ी रहत हे, फेर ओमन आज घलो अपन माटी ला नइ भुलाय हें।
"अचरज के बात ए हे के अतका बछर बाद घलो असम में रहइया हमर भाई-बहिनी मन छत्तीसगढ़ी भाखा, संस्कृति अउ रीत-रिवाज ला संजो के रखे हें। ओमन उहां अपन जम्मो तिहार-बार ला छत्तीसगढ़ी रंग में च मनाथें।" आज छत्तीसगढ़िया मन सिर्फ मजदूर बनके नइ, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर, व्यापारी अउ राजनीतिज्ञ बनके दुनिया के बड़े-बड़े देस मन में अपन पहचान बना चुके हें। अर्जेन्टीना ले लेके चीन तक छत्तीसगढ़ी संस्कृति के सुवास महकत हे।
ये मउका म पहुना मनके अलावा जागेश्वर प्रसाद, डॉ. सुरेश देशमुख, संजीव तिवारी, डॉ. पुरूषोत्तम चंद्राकर, डॉ. शुक्ला, रामेश्वर शर्मा, वैभव पांडेय, जयंत साहू, संजीव साहू, हेमलाल पटेल, मनीष लदेर, इंद्रदेव युद, संत फरिकार सहित अनेक सुजानी सियान जुरियाए रिहिन।



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