पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में 'श्रीमंत शंकरदेव शोध पीठ': अपन ल बिसर के पराया मन के सम्मान, का एहा उचित हे?

अंजोर
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पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में 'श्रीमंत शंकरदेव शोध पीठ': अपन ल बिसर के पराया मन के सम्मान, का एहा उचित हे?

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सबले बड़े अऊ पुराना विश्वविद्यालय, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर में 'आधुनिक असमिया जाति के जनक' श्रीमंत शंकरदेव के नाम ले शोध पीठ के गठन करे गे हे। ए खबर ह जतका अचम्भा में डारथे, ओतके मन ल दुखी घलो करथे। श्रीमंत शंकरदेव एक बहुत बड़े संत अऊ समाज सुधारक रहिन, ओखर काम मन ल पूरा दुनिया नमन करथे, फेर सवाल ए उठथे कि का छत्तीसगढ़ के गौरव ल भुला के दूसर राज्य के विभूति मन ल अइसने सम्मान देना जरूरी रहिस?

अपन माटी के नायकों के अपमान?

छत्तीसगढ़ के धरती में एक से बढ़ के एक बड़े साहित्यकार, इतिहासकार अऊ समाज सुधारक होइन। अइसन मनखे मन के कमी नइ हे जेन मन ह अपन पूरा जिनगी छत्तीसगढ़ी समाज अऊ संस्कृति बर लगा दीन। फेर बड़े दुख के बात हे कि विश्वविद्यालय प्रशासन ल शोध पीठ बर कोनो छत्तीसगढ़ी चेहरा नइ मिलिस। श्रीमंत शंकरदेव जी के सम्मान हम घलो करथन, फेर का ओखर नाम ले कोनो किताब या लाइब्रेरी के एक खंड काफी नइ रहिस? सीधे 'शोध पीठ' बना देना, कहीं न कहीं हमर अपन छत्तीसगढ़ी पुरखा मन के मेहनत अऊ ओखर विरासत के तिरस्कार आय।

का दूसर राज्य मन में छत्तीसगढ़िया मन ल मिलथे अइसन सम्मान?

सबले बड़े सवाल ए हे कि का असम, बंगाल, महाराष्ट्र या कोनो अउ राज्य में छत्तीसगढ़ के कोनो महान विभूति के नाम ले अइसन कोनो 'शोध पीठ' या कोनो बड़े सरकारी संस्थान के गठन करे गे हे? का असम के कोनो विश्वविद्यालय में शहीद वीर नारायण सिंह के नाम ले कोनो बड़ा काम होय हे?

इतिहास गवाह हे कि छत्तीसगढ़ के बाहर हमर प्रदेश के महापुरुष मन ल वो पहचान अऊ सम्मान कभू नइ मिलिस, जेखर वो हकदार रहिन। जब दूसर राज्य मन अपन माटी के मान ल पहिली रखथें, त फेर छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर में अइसन 'उदारता' के का मतलब?

बधाई देवें कि आलोचना करें?

ए समझ नइ आवत हे कि ए फैसला बर बधाई देना हे कि एखर विरोध करना हे। आलोचना एखर बर नइ कर सकन काबर कि श्रीमंत शंकरदेव एक प्रतिष्ठित नाम आंय, ओमन पूजनीय आंय। फेर ए बात ल घलो नइ नकारे जा सकय कि ए निर्णय ह छत्तीसगढ़ के अस्मिता अऊ इहां के महापुरुष मन के संग सरासर अन्याय आय।

अपन घर ल अंधियार में रख के दूसर के घर ल उजियारा करना समझ ले परे हे। शोध पीठ के मतलब होथे-अपन माटी के संस्कृति अऊ इतिहास ऊपर गहिरा खोज करना। जब हमर अपन लइका मन ल अपन पुरखा मन के बारे में शोध करे बर सुविधा नइ मिलही, त दूसर राज्य के महापुरुष मन ऊपर शोध करके हम का हासिल करबो? शासन अऊ प्रशासन ल विचार करना चाहिए कि छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालय मन में पहिली अधिकार इहां के माटी के पुत मन के होना चाहिए।

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