पाठ 1. मैं अमर शहीदों का चारण
- श्री कृष्ण 'सरल'
- पंक्तियों के अर्थ
मैं अमर शहीदों का चारण,
उनके यश गाया करता हूँ।
जो कर्ज राष्ट्र ने खाया है,
मैं उसे चुकाया करता हूँ॥
शब्दार्थ — अमर = जो न मरे, शहीद = बलिदानी, यश = कीर्ति, बड़ाई, चारण = भाट, कीर्तिगायक, कर्ज = ऋण।
संदर्भ — प्रस्तुत पंक्तियाँ 'मैं अमर शहीदों का चारण' नामक पाठ से अवतरित हैं। इसके कवि श्रीकृष्ण 'सरल' जी हैं।
प्रसंग — प्रस्तुत पंक्तियों के माध्यम से कवि ने देश पर मर-मिटने वाले अमर शहीदों के यश का गान किया है।
व्याख्या — कवि कहते हैं कि मैं देश पर मर-मिटने वाले अमर शहीदों के कीर्ति का यशगान करता हूँ और इस प्रकार मैं उस कर्ज को चुकाता हूँ, जो उन्होंने अपना सर्वस्व न्यौछावर करके राष्ट्र पर किया है।
यह सच है, याद शहीदों की
हम लोगों ने दफनाई है,
यह सच है उनकी लाशों पर
चलकर आजादी आई है।
उन गाथाओं से सर्द खून को,
मैं गरमाया करता हूँ।
मैं अमर शहीदों का चारण,
उनके यश गाया करता हूँ॥
शब्दार्थ — याद = स्मृति, दफनाई = जमीन में गाड़ा है, गाथाओं = कथाओं, कहानियों, सर्द = ठंडा।
संदर्भ — प्रस्तुत पंक्तियाँ 'मैं अमर शहीदों का चारण' नामक पाठ से अवतरित हैं। इसके कवि श्रीकृष्ण 'सरल' जी हैं।
प्रसंग — कवि बताता है कि वह बलिदानियों की गाथाओं को सुनाकर लोगों में ऊर्जा भरता रहता है।
व्याख्या — कवि कहता है कि हमने शहीदों को भुला दिया है, जबकि यह सच्चाई है कि हमें अपनी आजादी इन्हीं के बलिदानों के कारण ही प्राप्त हो सकी है। कवि कहते हैं कि मैं उन अमर सेनानियों की वीरता एवं त्याग से परिपूर्ण यश-गाथाओं को गाकर युवाओं के ठंडे पड़ गये खून को नई स्फूर्ति एवं ऊर्जा प्रदान करता हूँ। मैं देश पर मर-मिटने वाले अमर शहीदों का कीर्ति-गायक (भाट) हूँ और उनका यशगान किया करता हूँ।
गिरता है उनका रक्त जहाँ,
वे ठौर तीर्थ कहलाते हैं,
वे रक्तबीज अपने जैसों को
नई फसल दे जाते हैं।
यह धर्म, कर्म, यह मर्म सभी को,
मैं समझाया करता हूँ।
मैं अमर शहीदों का चारण,
उनके यश गाया करता हूँ॥
शब्दार्थ — रक्त = खून, ठौर = स्थान, रक्तबीज = एक राक्षस (कहते हैं रक्तबीज के शरीर से रक्त की जितनी बूंदें धरती पर गिरती थीं उतने ही राक्षस पैदा हो जाते थे), मर्म = रहस्य।
संदर्भ — प्रस्तुत पंक्तियाँ 'मैं अमर शहीदों का चारण' नामक पाठ से अवतरित हैं। इसके कवि श्रीकृष्ण 'सरल' जी हैं।
प्रसंग — कवि शहीदों के बलिदानों की महिमा एवं रहस्य बता रहा है।
व्याख्या — कवि कहते हैं कि अमर शहीदों के रक्त की बूंदें जहाँ-जहाँ गिरती हैं, वह स्थल तीर्थस्थल बन जाते हैं। उनका बलिदान 'रक्तबीज' की तरह देश को नये बलिदानी बनने की प्रेरणा देता है। मैं उन बलिदानियों के धर्म, कर्म और मर्म सभी को अपनी कविता के द्वारा समझाया करता हूँ। मैं अमर शहीदों का कीर्तिगायक हूँ और उनका यशगान करता रहता हूँ।
वे अगर न होते तो, भारत
मुर्दों का देश कहा जाता,
जीवन ऐसा बोझ होता
जो हमसे नहीं सहा जाता
इस पीढ़ी में उस पीढ़ी के,
मैं भाव जगाया करता हूँ।।
मैं अमर शहीदों का चारण,
उनके यश गाया करता हूँ।
शब्दार्थ — मुर्दा = लाश, बोझ = भार, भाव जगाना = विश्वास पैदा करना।
संदर्भ — प्रस्तुत पंक्तियाँ 'मैं अमर शहीदों का चारण' नामक पाठ से अवतरित हैं। इसके कवि श्रीकृष्ण 'सरल' जी हैं।
प्रसंग — इन पंक्तियों में कवि 'सरल' ने बताया है कि यदि शहीदों ने अपना बलिदान नहीं दिया होता तो इसका क्या परिणाम होता।
व्याख्या — कवि कहते हैं कि यदि ये अमर शहीद न होते तो आज भी भारत गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ मृत-देश के समान होता। हमारा जीवन ऐसे बोझ (भार) के समान होता जिसे हम सहन नहीं कर पाते। इसीलिए मैं अपनी कविता के द्वारा अमर शहीदों की कीर्ति का यशगान कर इस पीढ़ी में, उस पीढ़ी (अमर शहीदों की पीढ़ी) का विश्वास पैदा करता हूँ। मैं अमर शहीदों का कीर्तिगायक हूँ और उनका यशगान किया करता हूँ।
पूजे न गए शहीद तो फिर
वह बीज कहाँ से आएगा?
धरती को माँ कहकर मिट्टी
माथे से कौन लगाएगा?
मैं चौराहे-चौराहे पर,
ये प्रश्न उठाया करता हूँ।
जो कर्ज राष्ट्र ने खाया है,
मैं उसे चुकाया करता हूँ।।
शब्दार्थ — पूजे न गए = सम्मान न दिये गये, माथा = मस्तक, चौराहा = चार रास्तों का समूह।
संदर्भ — प्रस्तुत पंक्तियाँ 'मैं अमर शहीदों का चारण' नामक पाठ से अवतरित हैं। इसके कवि श्रीकृष्ण 'सरल' जी हैं।
प्रसंग — कवि ने इन पंक्तियों में बताया है कि यदि हम शहीदों का सम्मान नहीं करेंगे तो उसके क्या-क्या दुष्परिणाम होंगे।
व्याख्या — कवि कहते हैं कि यदि देश पर मर-मिटने वाले अमर शहीदों को सम्मान नहीं दिया गया तो अपने देश की धरती को माता कहकर कौन पुकारेगा? अपने देश की मिट्टी को अपने मस्तक पर कौन लगायेगा? अपने देश पर कुर्बान होने वाली पीढ़ी कहाँ से पैदा होगी? मैं चौक-चौराहों अर्थात् सर्वत्र यही प्रश्न उठाया करता हूँ, मैं बलिदानी वीरों की कीर्ति का गायन करके उनके द्वारा दिए कर्ज को उतारा करता हूँ जो उन्होंने अपने त्याग और बलिदान के रूप में राष्ट्र को दिया है।
- प्रश्न और अभ्यास
प्रश्न 1. यदि देशभक्तों ने अपनी कुर्बानी न दी होती तो देश पर क्या प्रभाव पड़ता?
उत्तर — यदि देशभक्तों ने अपनी कुर्बानी नहीं दी होती तो देश को आजादी प्राप्त न होती तथा हम आज भी गुलाम ही होते।
प्रश्न 2. कवि किसका यशगान कर रहा है?
उत्तर — कवि देश पर मर-मिटने वाले अमर शहीदों का यशगान कर रहा है।
प्रश्न 3. राष्ट्र के कर्ज को कवि किस प्रकार चुकाना चाहता है?
उत्तर — राष्ट्र के कर्ज को कवि उन अमर शहीदों की गाथाओं के यशगान से उनके दिखाये मार्ग का अनुसरण करते रहने की प्रेरणा देने के द्वारा चुकाना चाहता है।
प्रश्न 4. कवि के अनुसार यदि शहीदों को न पूजा गया तो उसका परिणाम क्या होगा?
उत्तर — कवि के अनुसार यदि शहीदों को न पूजा गया तो, देश हित में अपना सब कुछ न्यौछावर करने वाले तथा धरती माँ की मिट्टी को अपने माथे पर तिलक के रूप में लगाने वाले देशभक्त पैदा ही नहीं होंगे।
प्रश्न 5. कवि के अनुसार जहाँ शहीदों का रक्त गिरता है, उस स्थान को क्या कहते हैं?
उत्तर — जहाँ शहीदों का रक्त गिरता है, उस स्थान को कवि ने तीर्थस्थल कहा है।
प्रश्न 6. कविता की उन पंक्तियों को लिखो जिनमें ये भाव आए हैं-
(क) शहीदों को न पूजने का परिणाम बताया गया है।
उत्तर —
पूजे न गये शहीद तो फिर
वह बीज कहाँ से आएगा?
धरती को माँ कहकर मिट्टी
माथे से कौन लगाएगा?
(ख) शहीदों के बलिदान-स्थल को तीर्थ कहा गया है।
उत्तर —
गिरता है उनका रक्त जहाँ,
वे ठौर तीर्थ कहलाते हैं।
(ग) जीवन को बोझ माना गया है।
उत्तर— जीवन ऐसा बोझ होता जो हमसे नहीं सहा जाता।
प्रश्न 7. निम्नलिखित पंक्तियों के अर्थ स्पष्ट करो—
(क) यह सच है, ......................................................... आजादी आई है।
उत्तर— कवि कहता है कि हमने शहीदों को भुला दिया है, जबकि यह सच्चाई है कि हमें अपनी आजादी इन्हीं के बलिदानों के कारण ही प्राप्त हो सकी है। कवि कहते हैं कि मैं उन अमर सेनानियों की वीरता एवं त्याग से परिपूर्ण यश-गाथाओं को गाकर युवाओं के ठंडे पड़ गये खून को नई स्फूर्ति एवं ऊर्जा प्रदान करता हूँ। मैं देश पर मर-मिटने वाले अमर शहीदों का कीर्ति-गायक (भाट) हूँ और उनका यशगान किया करता हूँ।
(ख) पूजे न गए ......................................................... कौन लगाएगा?
उत्तर— कवि कहते हैं कि यदि देश पर मर-मिटने वाले अमर शहीदों को सम्मान नहीं दिया गया तो अपने देश की धरती को माता कहकर कौन पुकारेगा? अपने देश की मिट्टी को अपने मस्तक पर कौन लगायेगा? अपने देश पर कुर्बान होने वाली पीढ़ी कहाँ से पैदा होगी? मैं चौक-चौराहों अर्थात् सर्वत्र यही प्रश्न उठाया करता हूँ, मैं बलिदानी वीरों की कीर्ति का गायन करके उनके द्वारा दिए कर्ज को उतारा करता हूँ जो उन्होंने अपने त्याग और बलिदान के रूप में राष्ट्र को दिया है।
प्रश्न 8. "उन गाथाओं से सर्द खून को, मैं गरमाया करता हूँ" यह पंक्ति लिखकर कवि, पाठकों में कौन-सा भाव जाग्रत करना चाहता है?
उत्तर— "उन गाथाओं से सर्द खून को, मैं गरमाया करता हूँ" पंक्ति के द्वारा कवि पाठकों में देश के लिए मर-मिटने के लिए एक नई ऊर्जा, उत्साह एवं साहस का भाव जाग्रत करना चाहता है।
प्रश्न 9. "इस पीढ़ी में उस पीढ़ी के मैं भाव जगाया करता हूँ" ऐसे कौन-से भाव हैं जो कवि आज की पीढ़ी में जगाना चाहता है?
उत्तर— ऐसे वे भाव हैं जो अपना सर्वस्व त्याग कर देने, यहाँ तक कि अपने प्राणों को भी बलिदान करने के लिए तत्पर रहने की प्रेरणा प्रदान करते हैं, उन्हीं भावों को कवि आज की पीढ़ी में जगाना चाहता है।
- भाषा तत्व और व्याकरण
प्रश्न 1. धर्म, कर्म, मर्म, समान उच्चारण वाले शब्द हैं। ऐसे शब्द समानोच्चारित शब्द कहे जाते हैं। निम्नलिखित शब्दों के दो-दो समानोच्चारित शब्द लिखो— (चारण, अमर, कर्ज)
उत्तर—
- चारण— कारण, धारण।
- अमर— समर, कमर।
- कर्ज— मर्ज, तर्ज।
प्रश्न 2. निम्नलिखित शब्दों के विलोम लिखो—
उत्तर—
- अमीर — गरीब
- जगाना — सुलाना
- मुर्दा — जिन्दा
- धरती — आकाश
- यश — अपयश
- आजादी — गुलामी
- धर्म — अधर्म
- जीवन — मरण
प्रश्न 3. निम्नलिखित शब्दों को शब्दकोश (वर्णमाला) के क्रम में लिखो।
जैसे— अगर, ईख, कमल, चलना, हँसिया आदि।
(लगाव, रसद, अमर, यश, धरती, दमन, शहद, नवल, फसल, शहीद)
- उत्तर— अमर, दमन, धरती, नवल, फसल, यश, रसद, लगाव, शहद, शहीद।
सोचो और लिखो—
प्रश्न 4. 'याद' शब्द को उल्टा लिखने पर 'दया' शब्द बनता है। इसी प्रकार पाँच अन्य शब्द लिखो, जो उल्टा करने पर सार्थक शब्द बनते हों।
- उत्तर— 1. यान— नया, 2. नदी— दीन, 3. रसा— सार, 4. टर— रट, 5. मना— नाम।

सबो पाठक ल जोहार..,
हमर बेवसाइट म ठेठ छत्तीसगढ़ी के बजाए रइपुरिहा भासा के उपयोग करे हाबन, जेकर ल आन मन तको हमर भाखा ल आसानी ले समझ सके...
छत्तीसगढ़ी म समाचार परोसे के ये उदीम कइसे लागिस, अपन बिचार जरूर लिखव।
महतारी भाखा के सम्मान म- पढ़बो, लिखबो, बोलबो अउ बगराबोन छत्तीसगढ़ी।