मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ह आदिवासी मन तक उंकर सबो अधिकार पहुंचे के वायदा करे रिहिस। संग ही ओला हर रकम ले के शोषण ले मुक्ति देवाये के तको वायदा करिन रिहिस। ये वायदा के पूरा करे के खातिर सरकार ह सरलग अइसे कदम उठाए, जेकर ले जंगल के संग आदिवासी मन के रिश्ता फेर ले मजबूत होइस हावय अउ ये क्षेत्र म विकास के नवा बिहनिया होए हावय।
राज्य म वन अधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन ले जल-जंगल-जमीन म आदिवासी समाज के संबल मिले हावय। व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र, सामुदायिक वन अधिकार अउ सामुदायिक वन संसाधन के अधिकार के संग-साथ रिजर्व क्षेत्र म वन अधिकार वनवासियों के दे गे। विश्व आदिवासी दिन आदिवासी समाज के महापर्व हावय। एला पूरा गरिमा अउ भव्यता ले मनाने के सुरू राज्य सरकार डहर ले के गे हावय। छत्तीसगढ़ म आदिवासी मन के मान बढ़ाये के खातिर विश्व आदिवासी दिन म सार्वजनिक छुट्टी घोसित करे गे हावय।
पेसा कानून ले मिलही अधिकार
छत्तीसगढ़ सरकार पेसा कानून के नियम के लागू करे के विषय म गंभीरता ले प्रयास करत हावय। पेसा कानून के नियम बन जाये ले अब येकर क्रियान्वयन सरल हो जाही। येकर ले आदिवासी समाज के लोगन म आत्मनिर्भरता अउ स्वावलंबन के भावना आही। गांव सभा के अधिकार बाढ़ही। गांव सभा के 25 परतिसत सदस्य आदिवासी समुदाय के होही अउ ए 50 परतिसत म एक चौथाई महिला सदस्य होही। गांव सभा के अध्यक्ष आदिवासी ही होही। महिला अउ पुरूष अध्यक्ष के एक-एक साल के अंतराल म अगुवई के मउका मिलही। गांव के विकास म फइसला ले अउ आपसी झगरा के निपटारे के अधिकार तको एमन ल होही।


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