विश्व आदिवासी दिवस : छत्तीसगढ़ म आदिवासी मन के बढ़ा मान, मेहनत के मिले वाजिब दाम

अंजोर
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विश्व आदिवासी दिवस : छत्तीसगढ़ म आदिवासी मन के बढ़ा मान, मेहनत के मिले  वाजिब दाम


अंजोर.रायपुर। छत्तीसगढ़ के वन अउ आदिवासी सदियों ले राज्य के पहचान रिहिन हावयं। प्रदेस के लगभग आधा भू-भाग म जंगल हावयं, जिहां छत्तीसगढ़ के गौरवशाली आदिम संस्कृति फूलती-फलती हावय। आदिवासी मन के पूरा जिनगी जंगल म आधारित होए के बावजूद समय के संग-साथ उंकर जंगल के संग दूरी बाढ़त गिस। भारत के आन आदिवासी क्षेत्र के रकम ले छत्तीसगढ़ के आदिवासी मन के तको जल-जंगल-जमीन म अपन अधिकार के खातिर लड़ाई लड़नी पड़ी। अलग छत्तीसगढ़ राज्य के सपना इही अधिकार के वापसी के सपना था।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ह आदिवासी मन तक उंकर सबो अधिकार पहुंचे के वायदा करे रिहिस। संग ही ओला हर रकम ले के शोषण ले मुक्ति देवाये के तको वायदा करिन रिहिस। ये वायदा के पूरा करे के खातिर सरकार ह सरलग अइसे कदम उठाए, जेकर ले जंगल के संग आदिवासी मन के रिश्ता फेर ले मजबूत होइस हावय अउ ये क्षेत्र म विकास के नवा बिहनिया होए हावय।

राज्य म वन अधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन ले जल-जंगल-जमीन म आदिवासी समाज के संबल मिले  हावय। व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र, सामुदायिक वन अधिकार अउ सामुदायिक वन संसाधन के अधिकार के संग-साथ रिजर्व क्षेत्र म वन अधिकार वनवासियों के दे गे। विश्व आदिवासी दिन आदिवासी समाज के महापर्व हावय। एला पूरा गरिमा अउ भव्यता ले मनाने के सुरू राज्य सरकार डहर ले के गे हावय। छत्तीसगढ़ म आदिवासी मन के मान बढ़ाये के खातिर विश्व आदिवासी दिन म सार्वजनिक छुट्टी घोसित करे गे हावय।

राज्य के वन क्षेत्र म काबिज भूमि के आदिवासी मन अउ पारंपरागत निवासी मन के अधिकार दे के मामला म छत्तीसगढ़ देश म अग्रणी राज्य हावय। राज्य म निरस्त दावों के फेर समीक्षा करके वन अधिकार मान्यता पाती बांटे करे  जा रिहिन हावयं। पाछु पौने पांच साल म 59,791 व्यक्तिगत, 25,109 सामुदायिक वन अधिकारी पाती बांटे करे  गे हावयं। देश म सबले पहिली नगरीय क्षेत्र म व्यक्तिगत वन अधिकार, सामुदायिक वन अधिकार अउ सामुदायिक वन संसाधन अधिकार पाती प्रदाय करे के कार्यवाही छत्तीसगढ़ म के गे।

पेसा कानून ले मिलही अधिकार

छत्तीसगढ़ सरकार पेसा कानून के नियम के लागू करे के विषय म गंभीरता ले प्रयास करत हावय। पेसा कानून के नियम बन जाये ले अब येकर क्रियान्वयन सरल हो जाही। येकर ले आदिवासी समाज के लोगन म आत्मनिर्भरता अउ स्वावलंबन के भावना आही। गांव सभा के अधिकार बाढ़ही। गांव सभा के 25 परतिसत सदस्य आदिवासी समुदाय के होही अउ ए 50 परतिसत म एक चौथाई महिला सदस्य होही। गांव सभा के अध्यक्ष आदिवासी ही होही। महिला अउ पुरूष अध्यक्ष के एक-एक साल के अंतराल म अगुवई के मउका मिलही। गांव के विकास म फइसला ले अउ आपसी झगरा के निपटारे के अधिकार तको एमन ल होही।

छत्तीसगढ़ सरकार के विकास, विश्वास अउ सुरक्षा के नीति के चलत वनांचल म रेहे वाला लोगन के जिनगी म तेजी ले बदलाव आये हावय। आदिवासी मन के आय म बड़वार अउ ओला बुनियादी सुविधाउपलब्ध कराइन के खातिर सरकार तेजी ले काम करत हावय।

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