अंजोर.रायपुर, ढेमसा बीच भारत-दक्षिणी ओडिशा के क्षेत्र के आदिवासी लोगन के एक पारंपरिक लोक नृत्य हावय। जेमा नर्तक एक आन के खांध अउ कनिहा म पकड़कर अउ पारंपरिक वाद्ययंत्र के धुन म नृत्य करके एक श्रृंखला बनात हावयं। धेम्सा समूह म करे जाये वाला एक अनूठा लोक नृत्य हावय। येकर एक निश्चित रचना, शैली, लय, शरीर के भाषा, पारंपरिक वेशभूषा, केश, गोड़ के कदम उक हावयं।
पारंपरिक लोक वाद्ययंत्र के ए नृत्य म उपयोग करे जाथे ढोल, तमक, चंगू अउ मोहरी। ढोल बास ड्रम हावय, तमक, बोंगो के रकम ले एक वाद्य यंत्र हावय जेन ताल के गति के बनाए रखत हावय। मोहरी जोरुना के रकम ले एक पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्र हावय। ये नृत्य आम तौर म देर रतिहा म "देसिया" या "आदिवासी" नामक जनजाति डहर ले वार्षिक समारोह "चैत परब" अउ "पस पुनी" या "पस परब" सहित सबो समारोह म करे जाथे। मोहरी बजाये वाला के "मुहुरिया" किहिन जाथे जेन धुन बजात हावय अउ ढोल बजाये वाला ओकर अनुसरण करत हावयं।


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