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छत्तीसगढ़ के आरूग लोक कंठ के धनी श्रीमती कुलवंतीन मिर्झा ल सुरता करिस छत्तीसगढि़या क्रांति सेना


अंजोर.रायपुर, 7 जून 2021। छत्तीसगढ़ के कला, साहित्य अउ संस्कृति बर ठोस बुता करइया मनके सरेखा के बाना ऊंचाये प्रदेश के छत्तीसगढि़या क्रांति सेना ह आज आरूग लोक कंठ के धनी लोकप्रिय गायिका श्रीमती कुलवंतीन मिर्झा जी के पुण्यतिथि के मउका सुरता करिन हावय। ये मउका म CKS ह सोशल मीडिया के माध्यम ले नमन करत किहिन के भारत के मशहूर थियेटर आर्टिस्ट अउ छत्तीसगढ़ी लोकगायिका, आकाशवाणी, दूरदर्शन कलाकार स्व. श्रीमती कुलवंतीन मिर्झा जी ल उंकर चौथा पुण्यतिथि म शत-शत नमन। 

जन-जन म गुंजने वाला दिलकश आवाज जेला लोगन पंचराम अउ कुलवंतीन बाई के नाम ले जानथे, आज भी उंकर गीत लोक म सुने बर मिलथे। परब अउ धरम-करम के गीत के संगे संग ओमन जबरदस्त पैरोडी के शुरूआत करिन अउ बम्बई ले अवइया गीत मनके टक्कर उंकर केसेट छत्तीसगढ़ म छाये रहय। लोकमंच म उंकर एकतरफा प्रस्तुति राहय, अभिनय के लोहा तको ओमन नया थियेटर म देखाये हाबे। 

बताथे देव हीरा लहरी ह के कुलवंतीन मिर्झा जी हबीब तनवीर के नया थियेटर म अपन दमदार अदाकारी ले कई नाटक खेले हावय जेमा ओमन अहम किरदार म राहय। 80 के दशक म उंकर ‘शाजापुर की शांतिबाई’ नाटक अतका मशहूर होइस के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी जी स्वयं देखे बर आइस अउ उंकर कला के बढ़ाई करिन। ओमन शाजापुर की शांतिबाई के अलावा कामदेव का सपना, देख रहे नैन सहित केऊ नाटक ले रंग जगत म अपन अमिट छाप छोड़े हावय। 

श्रीमती कुलवंतीन बाई मिर्झा जी के स्वर म कर्मा, ददरिया, पंथी, जसगीत, सुआ, गौरा गीत के अलावा संस्कार अउ परब के कई सदाबहार गीत जइसे- कैसा रेल बनाया बनाने वाला, मोर घर के दुवारी म दसमत के फूल, तेहा आगी के ओखी, ये दरोगा बाबु, मोला रइपुर देखादे, ते कइसे उड़ाए रे मैना, आभा मार के तोला बुलाहूं, दुलौरिन बेटी, मोर लचके पातर कनिहा गजब लोकप्रिय होए हावय।

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