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kamarchhath pooja - कमरछठ : बेटी-बेटा खातिर महतारी मन के उपास के परब

कमरछठ, हलषष्ठी, हलछठ, खमरछठ, कुमार कार्तिकेय जन्मोत्सव, बलराम जयंती

छत्तीसगढ़ म भादो महीना के अंधियारी पाख म छठ के दिन महतारी मन अपन बेटी-बेटा मन खातिर उपास रखथे। जेला कमरछठ उपास केहे जाथे। ये दिन ल आने कोति आन-आन नाम लेथे जइसे हलषष्ठी, हलछठ, खमरछठ, बलराम जयंती, कार्तिक जन्मोत्सव आदि। हिन्दू पंचाक म भादो, अंधियारी के छठ के दिन ह अंग्रेजी केलेन्डर के मुताबिक 9 अगस्त 2020 के परही।

कमरछठ उपास- 

महतारी मन अपन बेटी-बेटा मनके बने देह, बड़वार अउ अवरधा भर उम्मर खातिर दिन भर उपास रिथे। माता मन बिहनिया ले महुआ पेड़ के दतून करके, सुघ्घर नहा-खोर के उपास रिथे। अऊ मंझन के बेरा गांव भरके उपसहिन मन एके ठउर म जुरियाके सगरी पूजा करथे। मंदिर-देवाला के तिर या गांव के गुड़ी म सगरी बनाके ओमा पानी रूकोथे। ये दिन माता मन खेत म नइ जावय अउ नागर म उपजे जिनिस ल नइ खावय। 

सगरी- 

सगरी एक प्रकार के प्रतिकात्मक तरिया आए, दो ठिन नानूक नानूक खने जाथे। सगरी के पार ल कासी, परसा, कनेर फूल, बेलपान आदि ले सजाये जाथे। इही सगरी म उपसहिन महतारी मन अपन बेटी-बेटा मन खातिर लोटा-लोटा पानी रूकोथे। 

गउरा गउरी के पूजा- 

सगरी के पास म पिड़हा म महादेव अउ पारवती ल आसन देके बइठारे जाथे। जेमा उपसहिन मन परसाद चघाथे। संग म लइका मनके माटी के नाननान भौरा, बाटी खेलौना तको रखे जाथे, लइका मनके गेड़ी ल सगरी म ही सरोये जाथे। जानबा होवय के गेड़ी ल हरेली के दिन बनाथे अउ कमरछठ के दिन सरोथे। 

कमरछठ के पूजा समान- 

ये दिन नागर जोताये अउ खेत के बोवाये जिनिस ल नइ बउरे जाए। महुआ पेड़ के दतून के संग पतरी, दोना अउ करछून बनाये जाथे। ये दिन गाय के दू के बजाये भइसी के दूध, दही के उपयोग करे जाथे। सेंधा नून के उपयोग करथे। पसहर चाउर के भात बनाथे, इही कमरछठ के परसाद आए। धान के लाई, महुआ, चना, गहूं, अरहर मिलाके छह किसम के अन्न मिलाके बांटे जाथे। कमरछठ म मुनका भाजी रांधाथे जेमा मुनगा म कोहड़ा, सेमी, तोरई, करेला, मिर्चा जइसन छह किसम के पाना डराये रिथे। कमरछठ म छह के आंकड़ा के विशेष महत्ता हावय छह किसम के भाजी, छह किसम के खिलौना, छह किसम के अन्न के प्रसाद अउ अब छह ठिन कथा तको सुने सुनाये के परंपरा हावय।

पसहर चाउर- 

पसहर ह विशेष प्रकार के चाउर आए जेला गांव के दाई-माई मन बछर भर अगाहू ले जोखा करके राखे रिथे। धान के करगा जेन हा कोनो डबरा-खचका, परिया, धरसा म अपने-अपन उपजे रिथे। पोठराये अउ पाके के बाद दाई-माई मन येकर बाले-बाल ल झेंझरी म झर्रा के लानथे। अऊ अंगना म सूखो देथे, बाद म ओला मूसर म छरके, निकिया के जोखा करके राख देथे। पसहर के चाउर नेंगहा आए अउ कमती रिथे तेन पाके अड़बड़ माहंगी तको बेचाथे।

पोती मारना- 

उपासहिन दाई-माई मन पूजा पाठ करके बाद अपन लइका मनके पीठ ल पोती मारथे। पोती नानकून नवा कपड़ा के बनाये जेला हरदी म फिलो के मारथे अउ अछरा म पोछथे। 

खेती, नांगर अउ गौधन- 

कमरछठ ल हलषष्ठी तको केहे जाथे। ये दिन भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम के जनम होए रिहिसे। नागर ले खेती करे जाथे अउ इही ह बलराम जी के प्रमुख हथियार तको आए। बलदाऊ भइया खेती के बुता करय, भगवान कृष्ण गौ पालन करे। इही सेती ये उपास म नागर जोताये जिनिस, खेत, अउ गौ माता के दुध-दही के उपयोग नइ करय। 

कमरछठ कथा- 

ये दिन उपास रहे माता मन संतान मनके देव धामी ले जुरे पौराणिक,धार्मिक,चमत्कारिक कथा सुनथे। बताये जाथे के वसुदेव-देवकी के 6 बेटा मनला एक-एक करके कंस ह कारागार म मार डरिस। जब सातवां के जनम के बेरा आथे तव देवर्षि नारद ह देवकी ल हलषष्ठी देवी के उपास राखे के सलाह देथे। देवकी ह ये उपास ल सबसे आगू रखथे। जेकर प्रभाव ले ओकर अवइया संतान के रक्षा होथे। सातवां संतान के जनम बेरा ल जानके भगवान श्री कृष्ण ह योगमाया ल आदेश देथे के माता देवकी के ये गर्भ के लइका ल वसुदेव के बड़े रानी रोहिणी के गर्भ म पहुंचा दे, जेन गोकुल म नंद-यशोदा के इहां रिथे अऊ तय सवांगे माता माता यशोदा के गर्भ ले जनम देबे। योगमाया ह भगवान के आदेश के पालन करिस, देवकी के गर्भ ले संकर्षण होके रोहणी के गर्भ ले संतान के रूप म बलराम के जनम होथे। ओकर बाद देवकी के आठवां संतान के रूप म स्वयं भगवान श्री कृष्ण के अवतार होथे। अइसन ठंग ले हलषष्ठी देवी के व्रत-पूजन ले देवकी के दूनो संतान के रक्षा हो जथे। 

कुमार कार्तिकेय जन्मोत्सव- 

कुमार कार्तिकेय ले जुरे परब ल दक्षिण भारत म विशेष रूप ले मनाये जाथे। कुमार कार्तिकेय जनम तको भादो के छठ के होए रिहिसे। महादेव अउ पारवती के दूसरा संतान कार्तिकेय ल सुब्रमण्यतम, मुरूगन अउ स्कंद तको कहे जाथे। दक्षिण भारत म कुमार कार्तिकेय के जनम के अनेक कथा प्रचलित हावय।

संकलन- 

जयंत साहू, डूण्डा-रायपुर छत्तीसगढ़ 

Mo- 9826753304

Email- jayantsahu9@gmail.com


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महतारी भाखा के उरउती खातिर भारत के समाचार पत्र के पंजीयक कार्यालय नई दिल्ली म पंजीकृत ' अंजोर ' छत्तीसगढ़ी मासिक पत्रिका के anjor.online वेब संस्करण म छत्तीसगढ़ी बुलेटिन, किस्सा-कहानी अउ कला-मनोरंजन संग सोशल मीडिया के चारी, कुछ आन भाखा के अनुवाद समोखे, छत्तीसगढ़ के जन भाखा म जन-जन तक बगराथन। जुड़व ये उदीम - anjore.cg@gmail.com

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