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रथयात्रा विशेष लेख श्रीमती राखी पटेल : भगवान जगन्नाथ के फोटू देखके नीम के लकड़ी ले बनाईन मूरति

पुरानी बस्ती टुरी हटरी के ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर 500 बछर जुन्ना हमर धरोहर


चारो धाम म एक धाम माने गय उड़ीसा के जगन्नाथ पुरी म हर बछर धूमधाम ले रथयातरा निकाले जाथे। अउ देस बिदेस ले कई लाख सरद्धालु मन आथे। ठीक ओइसनेच तरीका ले छत्तीसगढ़ के कई सहर रथयातरा के धूम मचथे। पड़ोसी राज उड़ीसा के कई लाख मनखे मन छत्तीसगढ़ के कोंटा-कोंटा म बसे हे। एमा हर जाति, धरम, बर्ग के मनखेमन रहिथे। एखरे खातिर छत्तीसगढ़ के संसकिरीति म ठीक ओइसनेच झलक दिखाई देथे। पूरी के सहीं भगवान जगन्नाथ, भइया बलदाऊ अउ बहिनी सुभदरा ल रथ म बइठाके घुमाय के परमपरा छत्तीसगढ़ म पुरखा जमाना ले चलत आत हे।
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला म जगन्नाथ स्वामी के रथयातरा के इतिहास 119 साल जुन्ना हे। ओ समे इहां भगवान जगन्नाथ के फोटू ल देखके नीम की लकडी के मूरति बनाय गए रिहिस। जेखर पूजा कई बछर ले चलत रिहिस। बहुत समे तक इहां ले निकलइया एकठन रथयातरा म दूरिहा-दूरिहा, तीर-तिखार अउ कोंटा-कोंटा ले मनखे मन आत रिहिन। समें के संग मनखेमन के बढ़त आस्था के परिणाम हे कि अब एकठन नइ बल्कि कतको जघा म उछाह के संग रथयातरा निकले लगे हे। 
भगवान जगन्नाथ के रथयातरा के इतिहास ग्राम दादरखुर्द ले भले ही 119 बछर ले जुरे हे पर उहां के मनखे मन मूरति स्थापना के संग पूजा अरचना 124 बछर पहिली ले ही सुरू कर दिए रिहिन। दादरखुर्द के पहचान भले ही सिमट गे होही, फेर 124 साल पहिली रथयातरा के नाव ले तीर-तिखार के जिला म उहां के चरचा अउ खियाति बने रिहिस। समे के संग अब रथयातरा ल लेके छेत्र बिसेस अउ उत्कल समाज के मनखेमन के मउजूदगी ले बढ़ गिस अउ एक संग कईठन स्थान ले रथयातरा निकले लगे हे,जे ए बछर 23 जून के निकलही। एखर संग पुरी जात-जात गांव म ही मंदिर बनवा दिस।
रइपुर म परसिद्ध रथयातरा पुरी म ही नइ छत्तीसगढ़ के राजधानी रइपुर के पुरानी बस्ती टुरी हटरी म बने ऐतिहासिक पराचीन जगन्नाथ मंदिर ला इतिहासकार लगभग 500 बछर पुराना बताथे, इहां घलो पीछू 500 बछर ले भगवान जगन्नाथ के परसिद्ध रथयातरा निकाले जाथे। इहां निकलइया रथयातरा ला खींचे के मउका सरद्धालुमन कभु नइ छोड़य। कहे जाथे कि ये रथयातरा म हर बछर छोटे अउ बड़े रूप म चमत्कार होथे, इही वजह ले सरद्धालुमन रथ ला हाथ लगाय के मउका नइ मिलय त वोमन रथ के रस्सी ला मात्र छूये के अवसर खोजथे। रइपुर के सदर बाजार म 250 बछर ले रथयातरा के परमपरा चलत आत हे। 
रइपुर के ही गायत्री नगर म तो राज के मुखिया राज्य पाल अउ मुखमंतरी जी सोन के झाड़ू ले बहारे के रसम ला अड़बड़ सुग्घर तरीका ले निभाथे। पूरी के सहीं तीन अलगे-अलगे रथ म भगवान ल बइठा के नगर म घुमाय जाथे। भगवान जगन्नाथ के रथ ल "नंदी घोस", बलभद्र के रथ ल "तालध्वज" अउ सुभदरा के रथ ला "देवदलन" रथ कहे जाथे। वर्ष 2000 म जब छत्तीसगढ़ राज के निरमान होइस तब मंदिर ल बनाए गिस। 2003 म मंदिर के निरमान होइस। अउ मूरति ल नीम के लकड़ी ले बनाए गय रिहिस। वैष्णव धरम के मानता हे के राधा अउ सिरीकिसन के युगल मूरति के परतीक खुद सिरी जगन्नाथ जी हे। एहि परतीक के रूप म सिरी जगन्नाथ ले पूरा जगत के उद्भव होय रिहिस।

- राखी पटेल
शिक्षक कॉलोनी डंगनिया, रायपुर छत्तीसगढ़
rakhipatel6511@gmail.com

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