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एसो राजपथ म रेंगही छत्तीसगढ़ के शिल्पकला अउ गहना के झांझी

नई दिल्ली। 26 जनवरी के अवसर म दिल्ली के राजपथ म एसो घलोक छत्तीसगढ़ के झांकी ल मउका मिले हावय जेन म छत्तीसगढ़ के शिल्पकला अउ गहना के सुघ्घर झांकी बनाये हाबे। अलग छत्तीसगढ़ राज बने के बाद ले ही प्रदेश के संगे-संग देशवासी तको अब अगोरा करथे छत्तीसगढ़ के झांकी के काबर ही इहां के झांकी ले लोगन मनला ग्रामीण जीवन अउ लोककला, संस्कृति, रहन-सहन के बारे म जाने ल मिलथे। पाछू केउ बछर ले अइसने झांकी मन दिल्ली म इनाम तको पाये हावय।...


एसो तो अउ गजब खास हावय, शिल्पकला के संगे-संग गहना तको देखे बर मिलही। झांकी म एक झि नारी परानी ह तोड़ा, पैरी, पैजन, लच्छा, साँटी, बिछिया, चुटकी, ऐंठी, कड़ा, टरकउव्वा, पटा, करधन, नांगमउरी, सूता, ककनी, खिनवा, लुरकी, छुमका, ढार, करन फूल, फुल्ली, नथ, रुपियामाला, तिलरी, पुतरी उक के सिंगार करे हावय।सबले आगू म नन्दी महराज बइठे हावय जेन छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध बेनमेटल से बने हावय। जोन इहां के ढोकरा-शिल्प के एक बेहतरीन नमूना आए। गजब सुघ्घर लोक जीवन के सजीव झांझी के संग म ककसार नृत्य करत लोक कलाकार मनके दल ह झांकी म अउ बने फबत हावय।

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