महाशिवरात्रि के परब हमर छत्तीसगढ़ी संस्कृति अऊ अध्यात्म के सबले बड़े अऊ पवित्र तिहार आय। पौराणिक मान्यता के मुताबिक, इही सुग्घर दिन भगवान शिव अऊ माता पार्वती के बिहाव संपन्न होय रिहिस, जेला हमन 'शिव-शक्ति' के मिलन के रूप में मनाथंन। कहिथें कि इही रात महादेव ह तांडव नाच करके सृष्टि के संतुलन ला बनाय रिहिस। भक्त मन बर ये दिन अंधियारी ला भगा के अंजोर बगराय के अऊ अज्ञान ला दूर करके ज्ञान पाय के दिन आय, जेकर से जीवन में सुख-शांति आथे।
महाशिवरात्रि के दिन महादेव के पूजा-अर्चना बड़ सरल अऊ मन ला मोहनी डारे वाला होथे। भक्त मन बिहनिया फिटी-फिटी उठ के नहाय-धोय के बाद सफ्फा लुगरा (कपड़ा) पहिरथें अऊ शिवालय जाके शिवलिंग में जल चढ़ाथें। 'ॐ नमः शिवाय' के मंत्र के जाप करत पूरा माहौल शिवमय हो जाथे। अइसन मानथें कि जे भक्त मन श्रद्धा के साथ उपवास रखथें, महादेव ओकर जम्मो दुख-पीरा ला हर लेथे। शिव जी ला रिझाय बर कोनो ताम-झाम के जरूरत नई राहय, ओ मन तो बस सच्चा मन अऊ भक्ति के भूखा रहिथें।
ए पूजा में पंचामृत स्नान अऊ खास चीज मन के बड़ भारी महत्व हे। शिवलिंग ऊपर गंगाजल, दूध, दही, घी अऊ शहद चढ़ाय से मन ला शांति अऊ तन ला निरोग काया मिलथे। एकर बाद महादेव के मनभावन चीज जैसे बेलपान (बेलपत्र), धतूरा, भांग अऊ अक्वन (आक) के फूल चढ़ाय जाथे। बेलपान के तीन पत्ती मन ला सत, रज अऊ तम गुन के प्रतीक माने जाथे। चंदन के लेप लगा के दीया बारे से घर-परिवार में सुख-समृद्धि अऊ ग्यान के अंजोर हरदम बने राहय।
महाशिवरात्रि के सबले खास बात आय 'चारों प्रहर के पूजा' अऊ 'निशिता काल' (अधरात के समय)। जब पूरा दुनिया सुते राहय, तब महादेव के विशेष साधना करे जाथे। रात भर जाग के शिव पुराण पढ़ना, भजन-कीर्तन करना भक्त मन ला माया-मोह से दूर ले जाथे। ये रात ऊर्जा के ऊपर बहे के समय मानथे, तेकर सेती रीढ़ के हड्डी ला सीधा रख के ध्यान लगाना साधक मन बर बहुत गुनकारी होथे। हमर छत्तीसगढ़ के राजिम, सिरपुर अऊ भोरमदेव जइसन तीरथ मन में ए दिन मेला के अजबे रौनक रहिथे।
आखिर में, महाशिवरात्रि हमन ला अपन भीतर के 'शिव तत्व' ला पहचाने के संदेस देथे। 'शिव' के मतलब ही 'कल्याण' होथे, अऊ ओकर पूजा हमन ला धीरज, त्याग अऊ दया के रद्दा देखाथे। चाहे कोनो गृहस्थ होय या सन्यासी, महादेव के सरन में आके सबो जीव ला शांति अऊ मोक्ष मिलथे। आओ, ये महाशिवरात्रि हमन संकल्प लेवन कि अपन भीतर के बुराई ला छोड़बोन अऊ सबकर भला करे के भावना के साथ महादेव के भक्ति में लीन होबो। जय जोहार, हर-हर महादेव!


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